Ganpati Aarti / श्री गणपति आरती

Shri Ganpati Aarti

Shri Ganpati Aarti, श्री गणपति आरती- गणपति की सेवा मंगल मेवा सेवा से सब विघ्न टरैं । तीन लोक तैंतीस देवता द्वार खड़े सब अर्ज करैं ।। टेर ।। ऋधिसिधि दक्षिण बाम विराजैं अरु आनंदसों चमर करैं । धूप दीप औलिया आरती भक्त खड्या जयकार करैं ।। गणप० ।। 1 ।। गुड़ के मोदक भोग लगत हैं मूषक वाहन चढ़ा सरैं । सौम्य रूप से ये गणपति को विघ्न भाजज्या दूर परैं ।। गणप० ।। 2 ।।

Aarti Ki Puja Vidhi / आरती की पूजा विधि

Aarti Ki Puja Vidhi Aur Mahattva

Aarti Ki Puja Vidhi Aur Mahattva, आरती की पूजा विधि और महत्त्व- आरती किसी भी देवी-देवता के भजन, कीर्तन और पूजा के अंत में किया जाने वाला एक महत्वपूर्ण कर्म है। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार इसे पूजा-पाठ आदि का अहम अंग बताया गया है। ऐसी मान्यता है कि न केवल आरती करने, बल्कि इसमें शामिल होने पर भी बहुत पुण्य मिलता है। आरती पूजन के अंत में इष्टदेवता की प्रसन्नता हेतु की जाती है। इसमें इष्टदेव को दीपक दिखाने के साथ उनका स्तवन तथा गुणगान किया जाता है यह देवता के गुणों की प्रशंसा गीत है।

Rani Sati Dadi Aarti / श्री राणी सती दादी आरती

Shri Rani Sati Dadi Aarti

Shri Rani Sati Dadi Aarti, श्री राणी सती दादी आरती- जय श्री राणी सती मैया, जय जगदम्ब सती जी । अपने भक्तजनों की दूर करो विपती ।। जय. अपनि अनन्तर ज्योति अखण्डित मंडित चहुँककूंभा । दुरजन दलन खडग की, विद्युतसम प्रतिभा ।। जय. मरकत मणि मन्दिर अति मंजुल, शोभा लखि न बड़े । ललित ध्वजा चहुँ ओर, कंचन कलश धरे ।। जय.

Shri Lalita Mata Ki Aarti / श्री ललिता माता की आरती

Shri Lalita Mata Ki Aarti

Shri Lalita Mata Ki Aarti, श्री ललिता माता की आरती- श्री मातेश्वरि जय त्रिपुरेश्वरि राजेश्वरि जय नमो नमः । करुणामयी सकल अघ हारिणि अमृत वर्षिणी नमो नमः ।। जय शरणं वरणं नमो नमः श्री मातेश्वरि जय त्रिपुरेश्वरि । अशुभ विनाशिनी, सब सुख दायिनी खलदल नाशिनि नमो नमः ।। भण्डासुर वधकारिणी जय माँ करुणा कलिते नमो नमः । जय शरणं वरणं नमो नमः श्री मातेश्वरि जय त्रिपुरेश्वरि ।।

Shakumbhari Devi Ki Aarti / माता शाकम्भरी देवी की आरती

Mata Shakumbhari Devi Ki Aarti

Mata Shakumbhari Devi Ki Aarti, माता शाकम्भरी देवी की आरती- हरि ॐ श्री शाकम्भर अम्बा जी की आरती कीजो । ऐसो अद्भुत रूप हृदय धर लीजो, शताक्षी दयालु की आरती कीजो । तुम परिपूर्ण आदि भवानी माँ, सब घट तुम आप बखानी माँ । शाकम्भर अम्बा जी की आरती कीजो तुम्हीं हो शाकम्भरी, तुम ही हो शताक्षी माँ, शिव मूर्ति माया, तुम ही हो प्रकाशी माँ। श्री शाकम्भर”

Sharda Mata Ki Aarti / श्री शारदा माता की आरती

Shri Sharda Mata Ki Aarti

Shri Sharda Mata Ki Aarti, श्री शारदा माता की आरती- भुवन विराजी शारदा, महिमा अपरम्पार । भक्तों के कल्याण को धरो मात अवतार ।। मैया शारदा तोरे दरबार आरती नित गाऊँ मैया शारदा तोरे दरबार आरती नित गाऊँ-२ नित गाऊँ मैया नित गाऊँ-२

Narmada Ji Ki Aarti / माँ नर्मदा जी की आरती

Maa Narmada Ji Ki Aarti

Maa Narmada Ji Ki Aarti, माँ नर्मदा जी की आरती- ॐ जय जगदानन्दी, मैया जय आनन्द कन्दी । ब्रह्मा हरिहर शंकर रेवा शिव हरि शंकर रुद्री पालन्ती ।। ॐ जय” ।। देवी नारद शारद तुम वरदायक, अभिनव पदचण्डी । सुर नर मुनि जन सेवत, सुर नर मुनि शारद पदवन्ती ।। ॐ जय” ।। देवी धूमक वाहन राजत वीणा वादयन्ती । झूमकत झूमकत झूमकत झननन झननन रमती राजन्ती ।। ॐ जय” ।।

Ganga Ji Ki Aarti / माँ गंगा जी की आरती

Maa Ganga Ji Ki Aarti

Maa Ganga Ji Ki Aarti, माँ गंगा जी की आरती- ॐ गंगे माता, श्री जय गंगे माता । जो नर तुमको ध्याता, मनवांछित फल पाता ।। चन्द्र सी ज्योति तुम्हारी जल निर्मल आता । शरण पड़े जो तेरी, सो नर तर जाता ।। पुत्र सगर के तारे सब जग की ज्ञाता । कृपा दृष्टि तुम्हारी, त्रिभुवन सुख दाता ।।

Baglamukhi Ji Ki Aarti / माँ बगलामुखी जी की आरती

Maa Baglamukhi Ji Ki Aarti

Maa Baglamukhi Ji Ki Aarti, माँ बगलामुखी जी की आरती- जय जय श्री बगलामुखी माता, आरति करहुँ तुम्हारी ।। टेक ।। पीत वसन तन पर तव सोहै, कुण्डल की छवि न्यारी ।। जय-जय” कर-कमलों में मुद्गर धारै, अस्तुति करहिं सकल नर-नारी ।। जय-जय” चम्पक माल गले लहरावे, सुर नर मुनि जय जयति उचारी ।। जय-जय”

Mata Parvati Ji Ki Aarti / माता पार्वती जी की आरती

Mata Parvati Ji Ki Aarti

Mata Parvati Ji Ki Aarti, माता पार्वती जी की आरती- जय पार्वती माता, जय पार्वती माता, ब्रह्म सनातन देवी शुभफल की दाता । अरिकुलपद्म विनासनी जय सेवकत्राता, जगजीवन जगदंबा हरिहर गुण गाता । सिंह का बाहन साजे कुण्डल हैं साथा, देवबंधु जस गावत नृत्य करत ता था । सतयुग रूप शील अतिसुन्दर नाम सती कहलाता, हेमांचल घर जन्मी सखियन संग राता ।

Annapurna Ji Ki Aarti / माँ अन्नपूर्णा जी की आरती

Maa Annapurna Ji Ki Aarti

Maa Annapurna Ji Ki Aarti, माँ अन्नपूर्णा जी की आरती- बारम्बार प्रणाम मैया बारम्बार प्रणाम । जो नहीं ध्यावै तुम्हें अम्बिके कहां उसे विश्राम । अन्नपूर्णा देवी नाम तिहारे लेते होत सब काम ।। प्रलय युगान्तर और जन्मान्तर, कालान्तर तक नाम । सुर सुरों की रचना करती, कहाँ कृष्ण कहाँ राम ।। चूमहि चरण चतुर चतुरानन चारु चक्रधरश्याम । चन्द्र चूड़ चन्द्रानन चाकर शोभा लखहि ललाम ।।

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