Amalaki Ekadashi Vrat Katha / आमलकी एकादशी व्रत कथा

Amalaki Ekadashi Vrat Katha Aur Puja Vidhi
आमलकी एकादशी व्रत कथा और पूजा विधि


Amalaki Ekadashi Vrat Katha Aur Puja Vidhi, आमलकी एकादशी व्रत कथा और पूजा विधि :- यह व्रत फाल्गुन शुक्ल एकादशी को किया जाता है। आँवले के वृक्ष में भगवान् का निवास होने के कारण इसका पूजन किया जाता है।

आमलकी एकादशी पूजा विधि :-

इस दिन प्रातःकाल स्नान आदि करने के उपरान्त भगवान् विष्णु की पूजा आँवले के वृक्ष नीचे करें और व्रत का संकल्प लें। धूप, दीप, नैवेद्य आदि से भगवान् की पूजा अर्चना करें।

आमलकी एकादशी व्रत कथा :-

प्राचीन काल में भारत देश में चित्रसेन नामक राजा राज्य करते थे। उनके राज्य में एकादशी व्रत का बहुत महत्त्व था। समस्त राजा-प्रजा एकादशी व्रत को किया करते थे।

एक दिन वह राजा जंगल में शिकार खेलते-खेलते काफी दूर निकल गये तभी कुछ जंगली जातियों ने उन्हें आकर घेर मिला। म्लेच्छों ने राजा के ऊपर अस्त्र-शस्त्रों का कठिन प्रयोग किया, मगर उन्हें कोई कष्ट न हुआ। ये देखकर सब आश्चर्य-चकित रह गये। जब उन जंगली जातियों की संख्या देखते ही देखते बहुत बढ़ गई तो राजा संज्ञाहीन होकर पृथ्वी पर धराशायी हो गये। उसी समय उनके शरीर से एक दिव्य शक्ति प्रकट हुई जो उन समस्त राक्षसों को मारकर अदृश्य हो गई।

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