Ashok Ashtami Vrat Katha Aur Puja / अशोक अष्टमी व्रत कथा

Ashok Ashtami Vrat Katha Aur Puja Vidhi
अशोक अष्टमी व्रत कथा और पूजा विधि


Ashok Ashtami Vrat Katha Aur Puja Vidhi, अशोक अष्टमी व्रत कथा और पूजा विधि :- अशोक अष्टमी का त्यौहार चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी को मनाया जाता है। इस दिन अशोक वृक्ष के पूजन का विधि विधान बताया जाता है। अशोक अष्टमी व्रत के बारे में गरुड़ पुराण में भगवान ब्रह्मा के द्वारा बताया गया है, इसके कारण से इस दिन की बहुत महत्ता है। इसी दिन चिरवियोगिता सीता जी को अशोक वाटिका में हनुमान जी द्वारा अँगूठी तथा सन्देश प्राप्त हुआ था।

अशोक अष्टमी व्रत पूजा विधि महत्त्व :-

इस दिन व्रत रखने के साथ-साथ सुबह स्नान आदि नित्यक्रिया के उपरान्त अशोक वृक्ष के नीचे भगवती जानकी तथा हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित कर विधिवत् पूजन करना चाहिए। पूजन के विधि होने के बाद अशोक वृक्ष की आठ कलियाँ लें और निम्नलिखित मन्त्र को पढ़ने के साथ जल ग्रहण करें —

त्वामशोक हराभीष्ट मधुमाससमुद्भव।
पिबामि शोकसन्तप्तो मामशोकं सदा शुरू ।।

इस दिन हनुमान जी द्वारा सीता की खोज-कथा रामचरित मानस से सुननी चाहिए। ऐसा करने से स्त्रियों का सौभाग्य अचल होता है। इस दिन अशोक वृक्ष के पेड़ के नीचे बैठने से स्त्रियों को समस्त कष्टों से छुटकारा मिल जाता है। इस दिन अशोक वृक्ष की कलिकाओं का रस निकाल कर पान करना चाहिए। इससे शरीर के रोग-विकार का समूल नाश हो जाता है। अशोक वृक्ष एक औषधि ही है। संस्कृत में इसे हेम पुष्प व ताम्रपपल्लव कहते हैं।

अशोक अष्टमी व्रत कथा :- 

इसके सम्बन्ध में अति प्राचीन कथा है कि रावण की नगरी लंका में अशोकवाटिका के नीचे निवास करने वाली चिरवियोगिता सीता को इसी दिन हनुमान जी ने भगवान् श्री राम जी द्वारा भेजा हुआ संदेश तथा अँगूठी माता जानकी को दिया था।

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