Ashok Vrat Katha Aur Puja Vidhi / अशोक व्रत कथा और पूजा

Ashok Vrat Katha Aur Puja Vidhi
अशोक व्रत कथा और पूजा विधि


Ashok Vrat Katha Aur Puja Vidhi, अशोक व्रत कथा और पूजा विधि :- यह व्रत आश्विन शुक्ल प्रतिपदा को मनाया जाता है। इस दिन अशोक वृक्ष की पूजा करने और व्रत करने का विधि विधान है।

अशोक व्रत पूजा विधि :-

इस दिन अशोक वृक्ष की पूजा करने और व्रत करने का विधि विधान है। प्रातःकाल स्नानादि करने के उपरान्त अशोक वृक्ष की पूजा कर व्रत करने का संकल्प लें। व्रत धारण करने वाले अशोक के वृक्ष को घी, गुड़, हल्दी, रोली, कलाया आदि से पूजें और जल से अर्घ्य देवें। यह नियम 12 वर्ष तक करना चाहिये। बारह वर्षों के उपरान्त अशोक का एक सोने का वृक्ष बनवायें और उसकी पूजा अर्चना कर अपने कुल-गुरु को समर्पित कर दें। जो मनुष्य इस प्रकार व्रत धारण करते हैं वे अन्त में शिवलोक में प्रतिष्ठा का स्थान प्राप्त करते हैं और इस लोक में शिवजी उनके सभी मनोरथ को पूर्ण करते हैं।

पूजा के साथ मन्त्र पढ़ें :-

पितृभ्रातृपतिश्वश्रुश्वशुराणामं तथैव च ।
अशोक शोकशमनो भव सर्वत्र नः कुले ।।

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