Basoda Vrat Katha / बासोड़ा व्रत कथा और पूजा विधि

Basoda Vrat Katha Aur Puja Vidhi
बासोड़ा व्रत कथा और पूजा विधि


Basoda Vrat Katha Aur Puja Vidhi, बासोड़ा व्रत कथा और पूजा विधि :- यह त्यौहार होली के सात-आठ दिन बाद अर्थात् चैत्र कृष्णपक्ष में प्रथम सोमवार या वृहस्पति को मनाया जाता है। इस दिन शीतला माता की पूजा की जाती है।

बासोड़ा के एक दिन पहले गुड़ या चीनी का मीठा भात आदि बनाना चाहिये। मोंठ बाजरा भिगोकर तथा रसोई की दीवाल धोकर हाथ सहित पाँचों ऊँगली घी में डुबोकर एक छापा लगाना चाहिये। रोली, चावल चढ़ाकर शीतला माता के गीत गाना चाहिये।

बासोड़ा पूजा विधि :-

बासोड़ा के दिन प्रातः एक थाली में भात, रोटी, दही, चीनी, जल का गिलास, रोली, चावल, मूँग की दाल का छिलका, हल्दी, धूपबत्ती, एक गूलरी ( बड़कुल्ला ) की माला जो होली के दिन मालाएँ बनाई थीं उनमें से मोंठ, बाजरा आदि रख लेना चाहिए।

इस सामान को घर के सभी प्राणियों को छुआकर शीतला माता पर भेज देना चाहिये। यदि किसी घर के सब व्यक्ति शीतला माँ की पूजा करने जाते हों तो स्त्रियाँ शीतला-माता के गीत गाती जावें।

यदि किसी के यहाँ कुंडारा भरता हो तो वे एक बड़ा कुंडारा और 10 छोटे कुंडारे मँगा लेवें। एक कुंडारा में रबड़ी, एक में भात, एक में रसगुल्ला, एक में बाजरा, एक में हल्दी पीसकर रख देवें और एक में इच्छानुसार पैसे रख लेवें, फिर सब कुंडारे में रख लेवें। उनकी हल्दी से पूजा कर लेवें, फिर सबके हल्दी से टीका काढ़ लेवें।

इसके बाद एक फूल माला ( गूलरी की माला ) सब कुंडारे और  समस्त पूजा सामग्री आदि शीतला माता पर ले जाकर चढ़ा देवें। कुंडारा का पूजन करने के बाद कहानी सुन लेवें।

बासोड़ा व्रत कथा :-

एक गाँव में एक बुढ़िया रहती थी। वह बासेड़े के दिन शीतला माता की पूजा करती और ठंडी रोटी खाती थी। उसके गाँव में और कोई भी शीतला माता को नहीं पूजता था।

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