Shukla Aur Krishna Marga Ka Vishay / शुक्ल और कृष्ण मार्ग

Shukla Aur Krishna Marga Ka Vishay

Shukla Aur Krishna Marga Ka Vishay. शुक्ल और कृष्ण मार्ग का विषय- हे भरतश्रेष्ठ ! अब मैं तुम्हें उन विभिन्न कालों को बताऊँगा, जिनमें इस संसार से प्रयाण करने के बाद योगी पुनः आता है अथवा नहीं आता। वैदिक मतानुसार इस संसार से प्रयाण करने के दो मार्ग हैं — एक प्रकाश का तथा दूसरा अंधकार का। जब मनुष्य प्रकाश के मार्ग से जाता है तो वह वापस नहीं आता, किन्तु अन्धकार के मार्ग से जाने वाला पुनः लौटकर आता है।

Bhakti Yog Ka Vishay / भक्ति योग का विषय

Bhakti Yog Ka Vishay

Bhakti Yog Ka Vishay, भक्ति योग का विषय- हे पार्थ ! जो व्यक्ति मेरा स्मरण करने में अपना मन निरन्तर लगाये रखकर अविचलित भाव से भगवान् के रूप में मेरा ध्यान करता है, वह मुझको अवश्य ही प्राप्त होता है। मनुष्य को चाहिए कि परमपुरुष का ध्यान सर्वज्ञ, पुरातन, नियन्ता, लघुतम से भी लघुतर, प्रत्येक का पालन- कर्ता, समस्त भौतिकबुद्धि से परे, अचिन्त्य तथा नित्य पुरुष के रूप में करे। वे सूर्य की भाँति तेजवान हैं और इस भौतिक प्रकृति से परे, दिव्य रूप हैं।

Arjun Ke Saat Prashn Aur Unka Uttar / अर्जुन के सात प्रश्न

Arjun Ke Saat Prashn Aur Unka Uttar

Brahm, Adhyatm Aur Karmadi Vishay Mein Arjun Ke 7 Prashn Aur Unka Uttar, ब्रह्म, अध्यात्म और कर्मादि के विषय में अर्जुन के 7 प्रश्न और उनका उत्तर- अर्जुन ने कहा — हे भगवान् ! हे पुरुषोत्तम ! ब्रह्म क्या है ? आत्मा क्या है ? सकाम कर्म क्या है ? यह भौतिक जगत् क्या है ? तथा देवता क्या है ? कृपा करके यह सब मुझे बताइये। भगवान् ने कहा — अविनाशी और दिव्य जीव ब्रह्म कहलाता है और उसका नित्य स्वभाव अध्यात्म या आत्म कहलाता है। जीवों के भौतिक शरीर से सम्बन्धित गतिविधि कर्म या सकाम कर्म कहलाती है।

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