Shastr Viprit Aachranon Ko Tyagne / शास्त्र विपरीत आचरणों

Shastr Viprit Aachranon Ko Tyagne Aur Shastranukul Aachranon Ke Liye Prerna

Shastr Viprit Aachranon Ko Tyagne Aur Shastranukul Aachranon Ke Liye Prerna, शास्त्र विपरीत आचरणों को त्यागने और शास्त्रानुकूल आचरणों के लिये प्रेरणा- इस नरक के तीन द्वार हैं — काम, क्रोध तथा लोभ। प्रत्येक बुद्धिमान व्यक्ति को चाहिए कि इन्हें त्याग दे, क्योंकि इनसे आत्मा का पतन होता है। हे कुन्तीपुत्र ! जो व्यक्ति इन तीनों नरक-द्वारों से बच पाता है, वह आत्म-साक्षात्कार के लिए कल्याणकारी कार्य करता है और इस प्रकार क्रमशः परम गति को प्राप्त होता है।

Asuri Sampada Valon Ke Lakshan / आसुरी सम्पदा वालों

Asuri Sampada Valon Ke Lakshan Aur Unki Adhogati Ka Kathan

Asuri Sampada Valon Ke Lakshan Aur Unki Adhogati Ka Kathan, आसुरी सम्पदा वालों के लक्षण और उनकी अधोगति का कथन- आसुरी व्यक्ति सोचता है, आज मेरे पास इतना धन है और अपनी योजनाओं से मैं और अधिक धन कमाऊँगा। इस समय मेरे पास इतना है, किन्तु भविष्य में यह बढ़कर और अधिक हो जायेगा। वह मेरा शत्रु है और मैंने उसे मार दिया है और मेरे अन्य शत्रु भी मार दिए जाएंगे। मैं सभी वस्तुओं का स्वामी हूँ। मैं भोक्ता हूँ।

Daivi Aur Asuri Sampada Ka Kathan / दैवी और आसुरी सम्पदा

Fal Sahit Daivi Aur Asuri Sampada Ka Kathan

Fal Sahit Daivi Aur Asuri Sampada Ka Kathan, फल सहित दैवी और आसुरी सम्पदा का कथन- भगवान् ने कहा- हे भरतपुत्र ! निर्भयता, आत्मशुद्धि, आध्यात्मिक ज्ञान का अनुशीलन, दान, आत्म-संयम, यज्ञपरायणता, वेदाध्ययन, तपस्या, सरलता, अहिंसा, सत्यता, क्रोधविहीनता, त्याग, शान्ति, छिद्रान्वेषण में अरुचि, समस्त जीवों पर करुणा, लोभविहीनता, भद्रता, लज्जा, संकल्प, तेज, क्षमा, धैर्य, पवित्रता, ईर्ष्या तथा सम्मान की अभिलाषा से मुक्ति — ये सारे दिव्य गुण हैं, जो दैवी प्रकृति से सम्पन्न देवतुल्य पुरुषों में पाये जाते हैं ।

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