Yogbhrasht Purush Ki Gati Ka Vishay / योगभ्रष्ट पुरुष

Yogbhrasht Purush Ki Gati Ka Vishay Aur Dhyanyogi Ki Mahima

Yogbhrasht Purush Ki Gati Ka Vishay Aur Dhyanyogi Ki Mahima, योगभ्रष्ट पुरुष की गति का विषय और ध्यानयोगी की महिमा- भगवान् ने कहा- हे पृथापुत्र ! कल्याण-कार्यों में निरत योगी का न तो इस लोक में और न परलोक में ही विनाश होता है। हे मित्र ! भलाई करने वाला कभी बुराई से पराजित नहीं होता। असफल योगी पवित्रात्माओं के लोकों में अनेकानेक वर्षों तक भोग करने के बाद या तो सदाचारी पुरुषों के परिवार में या कि धनवानों के कुल में जन्म लेता है।

Man Ke Nigrah Ka Vishay / मन के निग्रह का विषय

Man Ke Nigrah Ka Vishay

Man Ke Nigrah Ka Vishay, मन के निग्रह का विषय- अर्जुन ने कहा- हे मधुसूदन ! आपने जिस योगपद्धति का संक्षेप में वर्णन किया है, वह मेरे लिए अव्यावहारिक तथा असहनीय है, क्योंकि मन चंचल तथा अस्थिर है। भगवान् श्रीकृष्ण ने कहा — हे महाबाहु कुन्तीपुत्र ! निस्सन्देह चंचल मन को वश में करना अत्यन्त कठिन है, किन्तु उपयुक्त अभ्यास द्वारा तथा विरक्ति द्वारा ऐसा सम्भव है।

Vistar Se Dhyan Yog Ka Vishay / विस्तार से ध्यान योग

Vistar Se Dhyan Yog Ka Vishay

Vistar Se Dhyan Yog Ka Vishay, विस्तार से ध्यान योग का विषय- सिद्धि की अवस्था में, जिसे समाधि कहते हैं, मनुष्य का मन योगाभ्यास के द्वारा भौतिक मानसिक क्रियाओं से पूर्णतया संयमित हो जाता है। इस सिद्धि की विशेषता यह है कि मनुष्य शुद्ध मन से अपने को देख सकता है और अपने आपमें आनन्द उठा सकता है। उस आनन्दमयी स्थिति में वह दिव्य इन्द्रियों द्वारा असीम दिव्यसुख में स्थित रहता है।

Aatm Uddhar Ke Liye Prerna / आत्म उद्धार के लिए प्रेरणा

Aatm Uddhar Ke Liye Prerna Aur Bhagwatprapt Purush Ke Lakshan

Aatm Uddhar Ke Liye Prerna Aur Bhagwatprapt Purush Ke Lakshan, आत्म उद्धार के लिए प्रेरणा और भगवत्प्राप्त पुरुष के लक्षण- जिसने मन को जीत लिया है, उसने पहले ही परमात्मा को प्राप्त कर लिया है, क्योंकि उसने शान्ति प्राप्त कर ली है। ऐसे पुरुष के लिए सुख-दुःख, सर्दी-गर्मी एवं मान-अपमान एक से हैं। योगी को चाहिए कि वह सदैव अपने शरीर, मन तथा आत्मा को परमेश्वर में लगाए, एकान्त स्थान में रहे और बड़ी सावधानी के साथ अपने मन को वश में करें।

Karmyog Ka Vishay Aur Yogarudh Purush / कर्मयोग का विषय

Karmyog Ka Vishay Aur Yogarudh Purush Ke Lakshan

Karmyog Ka Vishay Aur Yogarudh Purush Ke Lakshan, कर्मयोग का विषय और योगारूढ़ पुरुष के लक्षण- श्रीभगवान् ने कहा — जो पुरुष अपने कर्मफल के प्रति अनासक्त है और जो अपने कर्तव्य का पालन करता है, वही संन्यासी और असली योगी है। वह नहीं, जो न तो अग्नि जलाता है और न कर्म करता है। जब कोई पुरुष समस्त भौतिक इच्छाओं का त्याग करके न तो इन्द्रियतृप्ति के लिए कार्य करता है और न सकामकर्मों में प्रवृत्त होता है तो वह योगारूढ़ कहलाता है।

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