Gyan Ki Mahima / ज्ञान की महिमा

Gyan Ki Mahima

Gyan Ki Mahima, ज्ञान की महिमा- तुम गुरु के पास जाकर सत्य को जानने का प्रयास करो। उनसे विनीत होकर जिज्ञासा करो और उनकी सेवा करो। स्वरूपसिद्ध व्यक्ति तुम्हें ज्ञान प्रदान कर सकते हैं, क्योंकि उन्होंने सत्य का दर्शन किया है। स्वरूपसिद्ध व्यक्ति से वास्तविक ज्ञान प्राप्त कर चुकने पर तुम पुनः कभी ऐसे मोह को प्राप्त नहीं होगे क्योंकि इस ज्ञान के द्वारा तुम देख सकोगे कि सभी जीव परमात्मा के अंशस्वरूप हैं, अर्थात् वे सब मेरे हैं।

Falsahit Prithak Prithak Yagyon Ka Kathan / फलसहित पृथक्

Falsahit Prithak Prithak Yagyon Ka Kathan

Falsahit Prithak Prithak Yagyon Ka Kathan, फलसहित पृथक् पृथक् यज्ञों का कथन- जो व्यक्ति कृष्णभावनामृत में पूर्णतया लीन रहता है, उसे अपने आध्यात्मिक कर्मों के योगदान के कारण अवश्य ही भगवद्धाम की प्राप्ति होती है, क्योंकि उसमें हवन आध्यात्मिक होता है और हवि भी आध्यात्मिक होती है। कठोर व्रत अंगीकार करके कुछ लोग अपनी सम्पत्ति का त्याग करके, कुछ कठिन तपस्या द्वारा, कुछ अष्टांग योगपद्धति के अभ्यास द्वारा अथवा दिव्यज्ञान में उन्नति करने के लिए वेदों के अध्ययन द्वारा प्रबुद्ध बनते हैं।

Yogi Mahatma Purushon Ke Achran / योगी महात्मा पुरुष

Yogi Mahatma Purushon Ke Achran

Yogi Mahatma Purushon Ke Achran Aur Unki Mahima, योगी महात्मा पुरुषों के आचरण और उनकी महिमा- जिस व्यक्ति का प्रत्येक प्रयास ( उद्यम ) इन्द्रियतृप्ति की कामना से रहित होता है, उसे पूर्णज्ञानी समझा जाता है। उसे ही साधु पुरुष ऐसा कर्ता कहते हैं, जिसने पूर्णज्ञान की अग्नि से कर्मफलों को भस्मसात् कर दिया है। अपने कर्मफलों की सारी आसक्ति को त्याग कर सदैव संतुष्ट तथा स्वतन्त्र रहकर वह सभी प्रकार के कार्यों में व्यस्त रहकर भी कोई सकाम कर्म नहीं करता।

Sagun Bhagwan Ka Prabhav / सगुण भगवान् का प्रभाव

Sagun Bhagwan Ka Prabhav

Sagun Bhagwan Ka Prabhav Aur Karmyog Ka Vishay, सगुण भगवान् का प्रभाव और कर्मयोग का विषय- प्राचीन काल में समस्त मुक्तात्माओं ने मेरी दिव्य प्रकृति को जान करके ही कर्म किया, अतः तुम्हें चाहिए कि उनके पदचिन्हों का अनुसरण करते हुए अपने कर्तव्य का पालन करो। कर्म क्या है और अकर्म क्या है , इसे निश्चित करने में बुद्धिमान् व्यक्ति भी मोहग्रस्त हो जाते हैं। अतएव मैं तुमको बताऊँगा की कर्म क्या है, जिसे जानकर तुम सारे अशुभ से मुक्त हो सकोगे।

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