Moh Se Vyapt Arjun / मोह से व्याप्त अर्जुन

Moh Se Vyapt Arjun Ke Kayarta

Moh Se Vyapt Arjun Ke Kayarta Sneh Aur Shokyukt Vachan, मोह से व्याप्त अर्जुन के कायरता स्नेह और शोकयुक्त वचन- हे गोविन्द ! हमें राज्य, सुख अथवा इस जीवन से क्या लाभ ! क्योंकि जिन सारे लोगों के लिए हम उन्हें चाहते हैं वे ही इस युद्धभूमि में खड़े हैं। हे मधुसूदन ! जब गुरुजन, पितृगण, पुत्रगण, पितामह, मामा, ससुर, पौत्रगण, साले तथा अन्य सारे सम्बन्धी अपना-अपना धन एवं प्राण देने के लिए तत्पर हैं और मेरे समक्ष खड़े हैं तो फिर मैं इन सबको क्यों मारना चाहूँगा, भले ही वे मुझे क्यों न मार डालें ? हे जीवों के पालक !

Arjun Dwara Sena Nirikshan / अर्जुन द्वारा सेना निरीक्षण

Arjun Dwara Sena Nirikshan Ka Prasang

Arjun Dwara Sena Nirikshan Ka Prasang, अर्जुन द्वारा सेना निरीक्षण का प्रसंग- उस समय हनुमान से अंकित ध्वजा लगे रथ पर आसीन पाण्डुपुत्र अर्जुन ने अपना धनुष उठा कर तीर चलाने के लिए उद्यत हुआ। हे राजन् ! धृतराष्ट्र के पुत्रों को व्यूह में खड़ा देखकर अर्जुन ने श्रीकृष्ण से ये वचन कहे। अर्जुन ने कहा – हे अच्युत ! कृपा करके मेरा रथ दोनों सेनाओं के बीच ले चलें जिससे मैं यहाँ उपस्थित युद्ध की अभिलाषा रखने वालों को और शस्त्रों की इस महान परीक्षा में, जिनसे मुझे संघर्ष करना है, उन्हें देख सकूँ।

Dono Senao Ki Shankh Dhwani / दोनों सेनाओं की शंख ध्वनि

Dono Senao Ki Shankh Dhwani Ka Kathan

Dono Senao Ki Shankh Dhwani Ka Kathan, दोनों सेनाओं की शंख ध्वनि का कथन- भगवान् कृष्ण ने अपना पाञ्चजन्य शंख बजाया, अर्जुन ने देवदत्त शंख तथा अतिभोजी एवं अतिमानवीय कार्य करने वाले भीम ने पौण्ड्र नामक भयंकर शंख बजाया। हे राजन् ! कुन्तीपुत्र राजा युधिष्ठिर ने अपना अनंतविजय नामक शंख बजाया तथा नकुल और सहदेव ने सुघोष एवं मणिपुष्पक शंख बजाये।

Dono Senao Ke Shurviron Ki Ganna / दोनों सेनाओं के शूरवीर

Dono Senao Ke Shurviron Ki Ganna

Dono Senao Ke Shurviron Ki Ganna, दोनों सेनाओं के शूरवीरों की गणना- धृतराष्ट्र ने कहा – हे संजय ! धर्मभूमि कुरुक्षेत्र में युद्ध की इच्छा से एकत्र हुए मेरे तथा पाण्डु के पुत्रों ने क्या किया ? ऐसे अन्य अनेक वीर भी हैं जो मेरे लिए अपना जीवन त्याग करने के लिए उद्यत हैं। वे विविध प्रकार के हथियारों से सुसज्जित हैं और युद्धविद्या में निपुण हैं। पराक्रमी युधामन्यु, अत्यंत शक्तिशाली उत्तमौजा, सुभद्रा का पुत्र तथा द्रोपदी के पुत्र – ये सभी महारथी हैं।

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