Bhagwat Prapti Ka Upay / भगवत प्राप्ति का उपाय

Bhagwat Prapti Ka Upay Aur Gunatit Purush Ke Lakshan

Bhagwat Prapti Ka Upay Aur Gunatit Purush Ke Lakshan, भगवत प्राप्ति का उपाय और गुणातीत पुरुष के लक्षण- भगवान् ने कहा- हे पाण्डुपुत्र ! जो प्रकाश, आसक्ति तथा मोह के उपस्थित होने पर न तो उनसे घृणा करता है और न लुप्त हो जाने पर उनकी इच्छा करता है, जो भौतिक गुणों की इन समस्त प्रतिक्रियाओं से निश्चल तथा अविचलित रहता है और यह जानकर कि केवल गुण ही क्रियाशील हैं, उदासीन तथा दिव्य बना रहता है।

Sat, Raj Aur Tam Teenon Gunn Ka Vishay / तीनों गुण का विषय

Sat, Raj Aur Tam Teenon Gunn Ka Vishay

Sat, Raj Aur Tam Teenon Gunn Ka Vishay, सत्, रज, तम तीनों गुण का विषय- भौतिक प्रकृति तीन गुणों से युक्त है। ये हैं — सतो, रजो तथा तमोगुण। हे महाबाहु अर्जुन ! जब शाश्वत जीव प्रकृति के संसर्ग में आता है, तो वह इस गुणों से बँध जाता है। हे निष्पाप ! सतोगुण अन्य गुणों की अपेक्षा अधिक शुद्ध होने के कारण प्रकाश प्रदान करने वाला और मनुष्यों को सारे पाप कर्मों से मुक्त करने वाला है। जो लोग इस गुण में स्थित होते हैं, वे सुख तथा ज्ञान के भाव से बँध जाते हैं। हे भरतपुत्र !

Gyan Ki Mahima Aur Prakriti / ज्ञान की महिमा और प्रकृति

Gyan Ki Mahima Aur Prakriti Purush Se Jagat Ki Utpatti

Gyan Ki Mahima Aur Prakriti Purush Se Jagat Ki Utpatti, ज्ञान की महिमा और प्रकृति पुरुष से जगत् की उत्पत्ति- भगवान् ने कहा- अब मैं तुमसे समस्त ज्ञानों में सर्वश्रेष्ठ इस परम ज्ञान को पुनः कहूँगा, जिसे जान लेने पर समस्त मुनियों ने परम सिद्धि प्राप्त की है। इस ज्ञान में स्थिर होकर मनुष्य मेरी जैसी दिव्य प्रकृति ( स्वभाव ) को प्राप्त कर सकता है। इस प्रकार स्थित हो जाने पर वह न तो सृष्टि के समय उत्पन्न होता है और न प्रलय के समय विचलित होता है । हे भरतपुत्र !

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