Prakriti Purush Ka Vishay / प्रकृति पुरुष का विषय

Gyan Sahit Gyan Sahit Prakriti Purush Ka Vishay

Gyan Sahit Prakriti Purush Ka Vishay, ज्ञान सहित प्रकृति पुरुष का विषय- हे भरतवंशियों में श्रेष्ठ ! यह जान लो कि चर तथा अचर, जो भी तुम्हें अस्तित्व में दीख रहा है, वह कर्मक्षेत्र तथा क्षेत्र के ज्ञाता का संयोग मात्र है। जो परमात्मा को समस्त शरीरों में आत्मा के साथ देखता है और जो यह समझता है कि इस नश्वर शरीर के भीतर न तो आत्मा, न ही परमात्मा कभी भी विनष्ट होता है, वही वास्तव में देखता है ।

Gyan Sahit Kshetra Kshetragya / ज्ञान सहित क्षेत्र क्षेत्र

Gyan Sahit Kshetra Kshetragya Ka Vishay

Gyan Sahit Kshetra Kshetragya Ka Vishay, ज्ञान सहित क्षेत्र क्षेत्रज्ञ का विषय- पंच महाभूत, अहंकार, बुद्धि, अव्यक्त ( तीनों गुणों की अप्रकट अवस्था ), दसों इन्द्रियाँ तथा मन, पाँच इन्द्रियविषय, इच्छा, द्वेष, सुख, दुःख, संघात, जीवन के लक्षण तथा धैर्य — इन सब को संक्षेप में कर्म का क्षेत्र तथा उसकी अन्तः क्रियाएँ ( विकार ) कहा जाता है। वे समस्त प्रकाशमान वस्तुओं के प्रकाशस्रोत हैं। वे भौतिक अन्धकार से परे हैं और अगोचर हैं। वे ज्ञान हैं, ज्ञेय हैं और ज्ञान के लक्ष्य हैं। वे सबके हृदय में स्थित हैं।

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