Chaturbhuj Roop Ke Darshan / चतुर्भुज रूप के दर्शन

Chaturbhuj Roop Ke Darshan

Bina Ananya Bhakti Ke Chaturbhuj Roop Ke Darshan Ki Durlabhta Aur Falsahit Ananya Bhakti Ka Kathan, बिना अनन्य भक्ति के चतुर्भुज रूप के दर्शन की दुर्लभता और फलसहित अनन्य भक्ति का कथन, – श्रीभगवान् ने कहा — हे अर्जुन ! तुम मेरे जिस रूप को इस समय देख रहे हो, उसे देख पाना अत्यन्त दुष्कर है। यहाँ तक कि देवता भी इस अत्यन्त प्रिय रूप को देखने की ताक में रहते हैं।

Vishwaroop Ke Darshan Ki Mahima / विश्वरूप के दर्शन

Vishwaroop Ke Darshan Ki Mahima

Bhagwan Dwara Apne Vishwaroop Ke Darshan Ki Mahima Ka Kathan Tatha Chaturbhuj Aur Saumyarup Ka Dikhaya Jana, भगवान् द्वारा अपने विश्वरूप के दर्शन की महिमा का कथन तथा चतुर्भुज और सौम्यरूप का दिखाया जाना- भगवान् ने कहा — हे अर्जुन ! मैंने प्रसन्न होकर अपनी अन्तरंगा शक्ति के बल पर तुम्हें इस संसार में अपने इस परम विश्वरूप का दर्शन कराया है। इसके पूर्व अन्य किसी ने इस असीम तथा तेजोमय आदि-रूप को कभी नहीं देखा था। हे कुरुश्रेष्ठ !

Chaturbhuj Roop Ka Darshan / चतुर्भुज रूप का दर्शन

Chaturbhuj Roop Ka Darshan

भयभीत हुए अर्जुन द्वारा भगवान् की स्तुति और चतुर्भुज रूप का दर्शन कराने के लिए प्रार्थना, Bhaybhit Huye Arjun Dwara Bhagvaan Ki Stuti Aur Chaturbhuj Roop Ka Darshan Karanae Ke Liye Prarthna- अर्जुन ने कहा — हे हृषीकेश ! आपके नाम के श्रवण से संसार हर्षित होता है और सभी लोग आपके प्रति अनुरक्त होते हैं। यद्यपि सिद्धपुरुष आपको नमस्कार करते हैं, किन्तु असुरगण भयभीत हैं और इधर-उधर भाग रहे हैं। यह ठीक ही हुआ है। हे महात्मा !

Bhagwan Dwara Apne Prabhav / भगवान् द्वारा अपने प्रभाव

Bhagwan Dwara Apne Prabhav Ka Varnan

Bhagwan Dwara Apne Prabhav Ka Varnan Aur Arjun Ko Yuddh Ke Liye Utsahit Karna, भगवान् द्वारा अपने प्रभाव का वर्णन और अर्जुन को युद्ध के लिए उत्साहित करना- भगवान् ने कहा — समस्त जगतों को विनष्ट करने वाला काल मैं हूँ और मैं यहाँ समस्त लोगों का विनाश करने के लिए आया हूँ। तुम्हारे ( पाण्डवों के ) सिवा दोनों पक्षों के सारे योद्धा मारे जाएँगे। अतः उठो ! लड़ने के लिए तैयार होओ और यश अर्जित करो।

Arjun Dwara Bhagwan Ke Vishwaroop / अर्जुन द्वारा भगवान्

Arjun Dwara Bhagwan Ke Vishwaroop Ko Dekhne Ki Stuti Karna

Arjun Dwara Bhagwan Ke Vishwaroop Ko Dekhne Ki Stuti Karna, अर्जुन द्वारा भगवान् के विश्वरूप को देखने की स्तुति करना- अर्जुन ने कहा — हे भगवान् कृष्ण ! मैं आपके शरीर में सारे देवताओं तथा अन्य विविध जीवों को एकत्र देख रहा हूँ। मैं कमल पर आसीन ब्रह्मा, शिवजी तथा समस्त ऋषियों एवं दिव्य सर्पों को देख रहा हूँ। हे देवेश ! कृपा करके मुझे बतलाइये कि इतने उग्ररूप में आप कौन हैं ?

Sanjay Dwara Dhritarashtra Ke Prati Vishwaroop / संजय

Sanjay Dwara Dhritarashtra Ke Prati Vishwaroop Ka Varnan

Sanjay Dwara Dhritarashtra Ke Prati Vishwaroop Ka Varnan, संजय द्वारा धृतराष्ट्र के प्रति विश्वरूप का वर्णन- संजय ने कहा — हे राजा ! इस प्रकार कहकर महायोगेश्वर भगवान् ने अर्जुन को अपना विश्वरूप दिखलाया। अर्जुन ने उस विश्वरूप में असंख्य मुख, असंख्य नेत्र तथा असंख्य आश्चर्यमय दृश्य देखे। यह रूप अनेक दैवी आभूषणों से अलंकृत था और अनेक दैवी हथियार उठाये हुए था। यह दैवी मालाएँ तथा वस्त्र धारण किये था और उस पर अनेक दिव्य सुगन्धियाँ लगी थीं।

Bhagwan Dwara Apne Vishwaroop Ka Varnan / भगवान् द्वारा

Bhagwan Dwara Apne Vishwaroop Ka Varnan

Bhagwan Dwara Apne Vishwaroop Ka Varnan, भगवान् द्वारा अपने विश्वरूप का वर्णन- भगवान् ने कहा — हे अर्जुन, हे पार्थ ! अब तुम मेरे ऐश्वर्य को, सैकड़ों-हजारों प्रकार के दैवी तथा विविध रंगों वाले रूपों को देखो। हे भारत ! लो, तुम आदित्यों, वसुओं, रुद्रों, अश्विनीकुमारों तथा अन्य देवताओं के विभिन्न रूपों को यहाँ देखो। तुम ऐसे अनेक आश्चर्यमय रूपों को देखो, जिन्हें पहले किसी ने न तो कभी देखा है, न सुना है। हे अर्जुन !

Vishwaroop Ke Darshan / विश्वरूप के दर्शन

Vishwaroop Ke Darshan Hetu Arjun Ki Prarthna

Vishwaroop Ke Darshan Hetu Arjun Ki Prarthna, विश्वरूप के दर्शन हेतु अर्जुन की प्रार्थना- अर्जुन ने कहा — आपने जिन अत्यन्त गुह्य आध्यात्मिक विषयों का मुझे उपदेश दिया है, उसे सुनकर अब मेरा मोह दूर हो गया है। हे कमलनयन ! मैंने आपसे प्रत्येक जीव की उत्पत्ति तथा लय के विषय में विस्तार से सुना है और आपकी अक्षय महिमा का अनुभव किया है। हे पुरुषोत्तम, हे परमेश्वर !

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