Budhi Teej Vrat Katha / बुढ़ी तीज व्रत कथा और पूजा विधि

Budhi Teej Vrat Katha Aur Puja Vidhi
बुढ़ी तीज व्रत कथा और पूजा विधि


Budhi Teej Vrat Katha Aur Puja Vidhi, बुढ़ी तीज व्रत कथा और पूजा विधि :- बुढ़ी तीज भादों बदी की तीज है। इस दिन व्रत कर गायों का पूजन करते हैं। सात गायों के लिए सात आटे की लोई बनाकर उन्हें खिलावें। फिर स्वयं भोजन करें। बहुएँ चीनी और रुपयों का बायना सासुजी को पाँय लगाकर देती हैं।

बुढ़ी तीज पूजा विधि महत्त्व :-

बुढी तीज के दिन गायों को भोजन कराया जाता है। सात गायों के लिए सात आटे की लोई बनाकर उन्हें खिलावें। फिर स्वयं भोजन करें। बहुएँ चीनी और रुपयों का बायना सासुजी को पाँय लगाकर देती हैं। महिलाएं सुबह स्नान आदि कर घर को साफ़-स्वच्छ कर पूजा करती हैं।

बुढ़ी तीज व्रत कथा :-

कथा के अनुसार एक साहूकार था और उसके सात बेटे थे। उसका सबसे छोटा बीटा अपाहिज था। वह एक वैश्या के घर जाता था। उसकी पत्नी पतिव्रता थी। खुद उसे कंधे पर बैठा कर वैश्या के यहाँ ले जाती थी। बहुत गरीब थी। जेठानियों के पास काम करके अपना गुजारा करती थी। हर दिन की तरह उस दिन भी वह अपने पति को कंधे पर बैठाकर छोड़ने गई, लेकिन वो बोलना भूल गया, तुम जाओ।

वह बाहर ही उसका इंतजार करने लगी इतने में जोर से आवाज आई …….. आवतारी जावतारी दोना खोल के पी, पिया प्यारी होय ……..

और पढ़ें

Leave a Comment

error: Content is protected !!