Budhwar Vrat Katha / बुधवार व्रत कथा और पूजा विधि

Budhwar Vrat Katha Aur Puja Vidhi
बुधवार व्रत कथा और पूजा विधि


Budhwar Vrat Katha Aur Puja Vidhi, बुधवार व्रत कथा और पूजा विधि :- ग्रह शान्ति तथा सर्व-सुखों की इच्छा रखने वालों को बुधवार का पूजन और  चाहिए।

बुधवार पूजा विधि :-

इस दिन स्नान आदि से निवृत्त होकर गंध-पुष्पादि से बुध भगवान् की पूजा कर व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इस दिन नवजात शिशु के हाथों से करवाये गए कृत्य से समस्त मनोकामनाएँ फलवती होती हैं। इस दिन उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिए। इस दिन हरे रंग की वस्तुओं का प्रयोग तथा दान अत्यन्त लाभदायी है। इस व्रत के अंत में शंकर जी की पूजा, धूप, बेल-पत्र आदि से करनी चाहिए। साथ ही बुधवार की कथा सुनकर आरती के बाद प्रसाद लेकर जाना चाहिये।

बुधवार व्रत कथा :-

एक समय की बात है, एक व्यक्ति अपनी पत्नी को विदा करवाने के लिये अपनी ससुराल गया। वहाँ पर कुछ दिन रहने के पश्चात् सास-ससुर से विदा करने के लिए कहा किन्तु सबने कहा कि आज बुधवार का दिन है आज के दिन गमन नहीं करते हैं। वह व्यक्ति किसी प्रकर न माना और हठधर्मी करके बुधवार के दिन ही पत्नी को विदा कराकर अपने नगर को चल पड़ा। राह में उसकी पत्नी को प्यास लगी तो उसने अपने पति से कहा कि मुझे बहुत जोर से प्यास लगी है। तब वह व्यक्ति लोटा लेकर रथ से उतरकर जल लेने चला गया। जैसे ही वह व्यक्ति लोटा लेकर रथ से उतरकर जल लेने चला गया। जैसे ही वह व्यक्ति पानी लेकर अपनी पत्नी के निकट आया तो वह यह देखकर आश्चर्य से चकित रह गया कि ठीक अपनी ही जैसी सूरत तथा वैसी ही वेश-भूषा में वह व्यक्ति उसकी पत्नी के साथ रथ में बैठा हुआ है।

उसने क्रोध से कहा कि तू कौन है जो मेरी पत्नी के निकट बैठा हुआ है। दूसरा व्यक्ति बोला कि यह मेरी पत्नी है। इसे मैं अभी-अभी ससुराल से विदा कराकर ला रहा हूँ। वे दोनों व्यक्ति परस्पर झगड़ने लगे। तभी राज्य के सिपाही आकर लोटे वाले व्यक्ति को पकड़ने लगे। स्त्री से पूछा — तुम्हारा असली पति कौन-सा है। तब पत्नी शांत ही रही क्योंकि दोनों एक जैसे थे।

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