Chaitra Purnima Vrat Katha / चैत्र पूर्णिमा व्रत कथा

Chaitra Purnima Vrat Katha Aur Puja Vidhi
चैत्र पूर्णिमा व्रत कथा और पूजा विधि


Chaitra Purnima Vrat Katha Aur Puja Vidhi, चैत्र पूर्णिमा व्रत कथा और पूजा विधि :- प्रत्येक मास की पूर्णिमा तिथि पवित्र मानी गई है। इस दिन गंगा नदी, सरोवर आदि में स्नान दान करने से एक मास तक स्नान का फल प्राप्त होता है। हिन्दुओं के घरों में स्त्रियाँ भगवान लक्ष्मी नारायण को प्रसन्न करने के लिए यह व्रत धारण करती हैं और सत्यनारायण प्रभु की कथा सुनी जाती है। चैत्र पूर्णिमा के दिन हनुमान जी का जन्म भी रहता है। ऐसे में यह पूर्णिमा और भी महत्त्वपूर्ण हो जाती है।

चैत्र पूर्णिमा व्रत कथा महत्त्व :-

चैत्री पूर्णिमा के दिन सुबह स्नान आदि नित्यक्रिया के उपरान्त हनुमान जी को पंचामृत में स्नान कराके धूप, दीप, नैवेद्य इत्यादि के द्वारा अभ्यर्चना करनी चाहिए। इस दिन राम जी की पूजा कर सकते हैं। चैत्र की पूर्णिमा चैती पूनम भी कही जाती है। इस दिन भगवान् योगेश्वर श्रीकृष्ण ने ब्रज में रासक्रीड़ा उत्सव का अन्तिम विशाल आयोजन किया था, जिसे महारास के नाम से पुकारा जाता है। छह माह की पूर्णिमाओं में रासक्रीड़ा उत्सव की समाप्ति हुई थी। इस दिन श्रीकृष्ण ने अपनी अन्नत योगमाया-शक्ति से अपने असंख्य रूप धारण कर जितनी गोपियाँ थीं उतने ही कान्हा का विराट वैभव विस्तार कर विषय-लोलुपता के देवता कामदेव पर योग पराक्रम से आत्माराम और पूर्ण काम स्थित प्रगट करके विजयी की थी।

और पढ़ें

Leave a Comment

error: Content is protected !!