Chalisa Sangrah / चालीसा संग्रह

Chalisa Sangrah
चालीसा संग्रह

पूजा पाठ में चालीसा का बहुत महत्त्व है। हमारे हिन्दू धर्म में जितने भी देवी-देवता हैं उन सभी को प्रसन्न करने हेतु चालीसा, आरती आदि कई ग्रन्थ, वेद, पुराण, भागवद्गीता, दुर्गासप्तशती जैसे अनेक महाग्रन्थ हैं।

चालीसा का पाठ कैसे करें :–

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपडे पहने
  • अपना मुँह पूर्व दिशा में रखें और साफ आसन पर बैठे।
  • पूजा में धूप दीप सफेद चंदन माला और स्फटिक माला और सफेद 5 फूल भी रखें और मिश्री को प्रसाद के लिए रखें।
  • पाठ करने से पहले गाय के घी का दिया जलायें और एक लोटे में शुद्ध जल भरकर रखें।
  • जिस भी देवी-देवता का पाठ करना है उसे भक्ति भाव से करें और भगवान को प्रसन्न किया जा सकता है।
  • पाठ पूरा हो जाने के उपरांत लोटे का जल सारे घर में छिड़क दें और थोड़ा सा जल स्वयं पी लें।

चालीसा पाठ करने के लाभ :–

  • चालीसा का पाठ करने से आध्यात्मिक, भौतिक और भावनात्मक खुशी की प्राप्ति होती है। 
  • रोजाना चालीसा के पाठ करने से मन को शान्ति प्राप्त होता है। बड़े-बड़े ऋषि मुनि मन को शान्त करने के लिए रोजाना चालीसा का पाठ करते थे।
  • अपने शरीर में साकारात्मक ऊर्जा का संचार बनाए रखने के लिए रोजाना चालीसा का पाठ कर सकते हैं।
  • दुश्मनों को हराने, नाकारत्मक ऊर्जा से लड़ने के लिए प्रतिदिन चालीसा का पाठ करना अति शुभ माना जाता है।
  • अपने मानसिक शक्ति को विकसित करने के लिए प्रतिदिन चालीसा का पाठ करना अति उत्तम माना गया है।
  • अपने परिवार जनों के हित हेतु ( अर्थात् वित्तीय नुकसान, संकट और नुकसान आदि ) के लिए प्रतिदिन चालीसा का पाठ करना चाहिए।

रणधीर प्रकाशन, हरिद्वार धार्मिक साहित्य की पुस्तकों को बहुत ही कम मूल्य पर उपलब्ध कराने वाले प्रकाशन द्वारा 51 चालीसा संग्रह को भाष्य के साथ आम जनता तक पहुँचाने में योगदान दिया है। 

हिन्दीस ब्लॉग (राधाकृष्ण) के माध्यम से हम 51 चालीसा संग्रह को प्रस्तुत करेंगे, इस प्रयास में हम सभी चालीसा का सरल अनुवाद हिन्दी में प्रस्तुत करेंगे। 

चालीसा के पाठ में विधि का ध्यान रखना तो उत्तम है ही, उसमें भी सबसे उत्तम बात है भगवान् के चरणों में प्रेमपूर्ण भक्ति। श्रद्धा और भक्ति के साथ परमात्मा के स्मरणपूर्वक चालीसा का पाठ करने वाले को उनकी कृपा का शीघ्र अनुभव हो सकता है। आशा है, प्रेमी पाठक इससे लाभ उठायेंगे। यद्यपि पुस्तक को सब प्रकार से शुद्ध बनाने की ही चेष्टा की गयी है, तथापि प्रमादवश कुछ अशुद्धियों का रह जाना असंभव नहीं है। ऐसी भूलों के लिए हम क्षमा माँगते हैं।

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