Chalisa Paath Kaise Karen / चालीसा पाठ कैसे करें

Chalisa Paath Kaise Karen

Chalisa Paath Kaise Karen, चालीसा पाठ कैसे करें- चालीसा का पाठ करने से आध्यात्मिक, भौतिक और भावनात्मक खुशी की प्राप्ति होती है। रोजाना चालीसा के पाठ करने से मन को शान्ति प्राप्त होता है। बड़े-बड़े ऋषि मुनि मन को शान्त करने के लिए रोजाना चालीसा का पाठ करते थे। अपने शरीर में साकारात्मक ऊर्जा का संचार बनाए रखने के लिए रोजाना चालीसा का पाठ कर सकते हैं। दुश्मनों को हराने, नाकारत्मक ऊर्जा से लड़ने के लिए प्रतिदिन चालीसा का पाठ करना अति शुभ माना जाता है।

Rani Sati Dadi Chalisa / श्री राणी सती दादी चालीसा

Shri Rani Sati Dadi Chalisa

Shri Rani Sati Dadi Chalisa, श्री राणी सती दादी चालीसा- नमो नमो श्री सती भवानी, जग विख्यात सभी मन मानी । नमो नमो संकटकूँ हरनी, मन वांछित पूरण सब करनी । नमो नमो जय जय जगदम्बा, भक्तन काज न होय विलम्बा । नमो नमो जय-जय जग तारिणी, सेवक जन के काज सुधारिणी । दिव्य रूप सिर चुँदर सोहे, जगमगात कुण्डल मन मोहे । माँग सिन्दूर सुकाजर टीकी, गज मुक्ता नथ सुन्दरर नीकी ।

Lalita Mata Chalisa / श्री ललिता माता चालीसा

Shri Lalita Mata Chalisa

Shri Lalita Mata Chalisa, श्री ललिता माता चालीसा- जयति जयति जय ललिते माता, तब गुण महिमा है विख्याता । तू सुन्दरि, त्रिपुरेश्वरी देवी, सुर नर मुनि तेरे पद सेवी । तू कल्याणी कष्ट निवारिणी, तू सुख दायिनी, विपदा हारिणी । मोह विनाशिनी दैत्य नाशिनी, भक्त भाविनी ज्योति प्रकाशिनी ।

Shakambhari Chalisa / श्री शाकम्भरी चालीसा

Shri Shakambhari Chalisa

Shri Shakambhari Chalisa, श्री शाकम्भरी चालीसा- शाकम्भरी माँ अति सुखकारी, पूर्ण ब्रह्म सदा दुःख हारी । कारण करण जगत की दाता, आनन्द चेतन विश्व विधाता । अमर जोत है मात तुम्हारी, तुम ही सदा भगतन हितकारी । महिम अमित अथाह अर्पणा, ब्रह्म हरि हर मात अर्पणा ।

Sharda Chalisa / श्री शारदा चालीसा

Shri Sharda Chalisa

Shri Sharda Chalisa, श्री शारदा चालीसा- जय जय जय शारदा महारानी, आदि शक्ति तुम जग कल्याणी । रूप चतुर्भुज तुम्हरो माता, तीन लोक महं तुम विख्याता । दो सहस्त्र बर्षहि अनुमाना, प्रगट भई शारद जग जाना । मैहर नगर विश्व विख्याता, जहां बैठी शारद जग माता ।

Narmada Chalisa / श्री नर्मदा चालीसा

Shri Narmada Chalisa

Shri Narmada Chalisa, श्री नर्मदा चालीसा- जय-जय-जय नर्मदा भवानी, तुम्हरी महिमा सब जग जानी । अमरकण्ठ से निकलीं माता, सर्व सिद्धि नव निधि की दाता । कन्या रूप सकल गुण खानी, जब प्रकटीं नर्मदा भवानी । सप्तमी सूर्य मकर रविवारा, अश्वनि माघ मास अवतारा ।

Ganga Chalisa / श्री गंगा चालीसा

Shri Ganga Chalisa

Shri Ganga Chalisa, श्री गंगा चालीसा- जग जग जननि हरण अघ खानी, आनन्द करनि गंग महारानी । जय भागीरथि सुरसरि माता, कलिमल मूल दलनि विख्याता । जय जय जय हनु सुता अघ हननी, भीषम की माता जग जननी । धवल कमल दल मम तनु साजे, लखि शत शरद चन्द्र छवि लाजे । वाहन मकर विमल शुचि सोहै, अमिय कलश कर लखि मन मोहै ।

Baglamukhi Mata Chalisa / श्री बगलामुखी माता चालीसा

Shri Baglamukhi Mata Chalisa

Shri Baglamukhi Mata Chalisa, श्री बगलामुखी माता चालीसा- जय जय जय श्री बगला माता, आदिशक्ति सब जग की त्राता । बगला सम तब आनत माता, एहि ते भयउ नाम विख्याता । शशि ललाट कुण्डल छवि न्यारी, अस्तुति करहिं देव नर-नारी । पीतवसन तन पर तव राजै, हाथहिं मुद्गर गदा विराजै । तीन नयन गल चम्पक माला, अमित तेज प्रकटत है भाला ।

Parvati Chalisa / माँ पार्वती चालीसा

Maa Parvati Chalisa

Maa Parvati Chalisa, माँ पार्वती चालीसा- ब्रह्मा भेद न तुम्हरो पावे, पंच बदन नित तुमको ध्यावे । षड्मुख कहि न सकत यश तेरो, सहसबदन श्रम करत घनेरो । तेऊ पार न पावत माता, स्थित रक्षा लय हित सजाता । अधर प्रवाल सदृश अरुणारे, अति कमनीय नयन कजरारे । ललित ललाट विलेपित केशर, कुंकुंम अक्षत शोभा मनहर ।

Annapurna Maa Chalisa / श्री अन्नपूर्णा माँ चालीसा

Shri Annapurna Maa Chalisa

Shri Annapurna Maa Chalisa, श्री अन्नपूर्णा माँ चालीसा- नित्य अनंद करिणी माता, वर-अरु अभय भाव प्रख्याता । जय ! सौंदर्य सिंधु जग-जननी, अखिल पाप हर भव-भय-हरनी । श्वेत बदन पर श्वेत बसन पुनि, संतन तुव पद सेवत ऋषिमुनि । काशी पुराधीश्वरी माता, माहेश्वरी सकल जग-त्राता । वृषभारूढ़ नाम रुद्राणी, विश्व विहारिणि जय ! कल्याणी ।

Shri Santoshi Mata Chalisa / श्री संतोषी माता चालीसा

Shri Santoshi Mata Chalisa

Shri Santoshi Mata Chalisa, श्री संतोषी माता चालीसा- जय संतोषी मां जग जननी, खल मति दुष्ट दैत्य दल हननी । गणपति देव तुम्हारे ताता, रिद्धि सिद्धि कहलावहं माता । माता-पिता की रहौ दुलारी, कीरति केहि विधि कहूं तुम्हारी । क्रीट मुकुट सिर अनुपम भारी, कानन कुण्डल को छवि न्यारी । सोहत अंग छटा छवि प्यारी, सुन्दर चीर सुनहरी धारी ।

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