Chanakya Niti Evam Sutra Sangrah / चाणक्य नीति एवं सूत्र

Chanakya Niti Evam Sutra Sangrah
चाणक्य नीति एवं सूत्र संग्रह

Chanakya Niti Evam Sutra Sangrah, चाणक्य नीति एवं सूत्र संग्रह :- ‘चाणक्य नीति’ नामक यह ग्रन्थ आचार्य चाणक्य की कूटनीति का सार है। जनसाधारण सुख से रहे, उसे अच्छे-बुरे की समझ हो, करने तथा न करने योग्य कार्यों का ज्ञान हो, राजा को अपने कर्तव्यों का बोध रहे, उसे कहाँ कब और कैसे किस प्रकार का आचरण कर सत्ता पर पकड़ बनाए रखने के साथ-साथ प्रजा का भला करना है। इन सभी सूक्ष्म विषयों पर आचार्य ने शास्त्र-सम्मत प्रकाश डाला है।

चाणक्य नीति एक अति प्रचलित और एक कूटनीति का सार है। प्रत्येक मनुष्य इस पुस्तक की मदद से एक सही जीवन जीने की रास्तें को ढूँढ सकता है। चाणक्य जी एक महान अर्थशास्त्र के ज्ञाता हैं। 

विष्णुगुप्त राजनीति के पितामह कहे गए हैं। चणक पुत्र होने के कारण आप ही चाणक्य के नाम से विख्यात हुए और संसार के समक्ष एक नया इतिहास रचा। आपके ही कर-कमलों द्वारा विश्व-प्रसिद्ध ‘ अर्थशास्त्र ‘ कौटिल्य अर्थशास्त्र नामक ग्रन्थ की रचना हुई। आचार्य चाणक्य पक्के कूटनीतिज्ञ थे। उन्हीं की नीतियों के फलस्वरूप भारतवर्ष एक परचम के नीचे संगठित हुआ। उन्हीं की कूटनीति थी कि विश्व-विजय का स्वप्न देखने वाले सिकन्दर को भारत से खाली हाथ लौटना पड़ा।

चाणक्य नीति‘ नामक यह ग्रन्थ आचार्य चाणक्य की कूटनीति का सार है। जनसाधारण सुख से रहे, उसे अच्छे-बुरे की समझ हो, करने तथा न करने योग्य कार्यों का ज्ञान हो, राजा को अपने कर्तव्यों का बोध रहे, उसे कहाँ कब और कैसे किस प्रकार का आचरण कर सत्ता पर पकड़ बनाए रखने के साथ-साथ प्रजा का भला करना है। इन सभी सूक्ष्म विषयों पर आचार्य ने शास्त्र-सम्मत प्रकाश डाला है।

इस प्रकार यह ग्रन्थ प्रत्येक व्यक्ति के लिए एक हितैषी मार्ग-दर्शक का कार्य करता है। पाठक वर्ग इस प्राचीन नीति-ग्रन्थ से अवश्य ही लाभान्वित होगा, इसी आशा के साथ इस ग्रन्थ का प्रकाशन भाषा-टीका सहित किया गया है।

प्रस्तुत पुस्तक में उन्हीं चणक पुत्र चाणक्य की नीतियों का भावार्थ एवं व्याख्या सहित प्रस्तुत किया गया है। मेरा विश्वास है कि चाणक्य की यह नीति आज भी उतनी ही सार्थक एवं प्रभावशाली है, जितनी उस काल में थी। यदि शासक एवं प्रजा वर्ग आज भी चाणक्य नीति के अनुसार अपने-अपने कर्त्तव्य को निभाएँ तो एक नए भारत की तस्वीर हमारे सामने आएगी।

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