Chanakya niti chapter three-3 / चाणक्य नीति तीसरा अध्याय

Chanakya niti chapter three

Chanakya niti chapter three-3 , चाणक्य नीति तीसरा अध्याय :- हमारे शास्त्रों में कहा गया है कि मनुष्य जन्म बड़ा ही दुर्लभ है, इसे व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए। जो मनुष्य जन्म पाकर भी पुरुषार्थ नहीं करता, धन अर्जित करके धर्मार्थ के कार्य के कार्य नहीं करता, सृष्टि की वृद्धि के लिए काम नामक पुरुषार्थ से विमुख रहता है तथा वृद्धावस्था आने पर मोक्ष के लिए प्रयत्न नहीं करता, वह युगों-युगों तक चौरासी के फेर में पड़ा रहता है।

Chanakya niti chapter two 2 / चाणक्य नीति द्वितीय अध्याय

Chanakya niti chapter two

Chanakya niti chapter two, चाणक्य नीति द्वितीय अध्याय :- इस श्लोक में आचार्य श्री ने अतिथि को चेताया है कि वह अपने सम्मान की रक्षा के लिए गृहस्थी का घर भोजनोपरांत तुरन्त छोड़ दे, वहाँ डेरा जमाने की चेष्टा न करे। कुछ लोग किसी के अतिथि बनकर जाते हैं और वहाँ की सुख-सुविधाओं अथवा सु-स्वादिष्ट पकवानों के लोभ में वहीं जमे रहते हैं यह ठीक नहीं है, उन्हें अपमानित होना पड़ सकता है।

Chanakya niti chapter one 1 / चाणक्य नीति प्रथम अध्याय

Chanakya niti chapter one

Chanakya niti chapter one chapter 1, चाणक्य नीति प्रथम अध्याय, चाणक्य नीति अध्याय एक अध्याय 1 :- धनवान का कार्य है समय पड़ने पर ऋण देना। यदि हम इतिहास उठाकर देखें तो ज्ञात होता है कि संकट काल में प्रजा के हित के लिए राजा लोग भी धनिक लोगों से कर्ज आदि लेकर राज-काज का कार्य सुचारु रूप से चलाते थे। इसके अतिरिक्त धनी लोग राज्य की योजनाओं में भी सहयोगी होती हैं।

Who was chanakya / कौन थे चाणक्य

Who was chanakya

Who was chanakya, कौन थे चाणक्य :- ब्राह्मण चणक और शकटार से ज्यादा, खरी-खरी सुनने वाले और अपनी कारगुजारियों का प्रबल विरोध करने वाले ब्राह्मण चणक से अत्यन्त क्रोधित थे अतः कायदे-कानून को ताक पर रखकर उन्होंने अंधा आदेश जारी किया कि इस फूस से ब्राह्मण का सिर काटकर चौराहे पर लटका दिया जाए जिससे नंद-विरोधियों को सबक मिले, किन्तु महामात्य राक्षस इस पक्ष में नहीं थे।

Chanakya Niti Evam Sutra Sangrah / चाणक्य नीति एवं सूत्र

Chanakya Niti Evam Sutra Sangrah

Chanakya Niti Evam Sutra Sangrah, चाणक्य नीति एवं सूत्र संग्रह :-  विष्णुगुप्त राजनीति के पितामह कहे गए हैं। चणक पुत्र होने के कारण आप ही चाणक्य के नाम से विख्यात हुए और संसार के समक्ष एक नया इतिहास रचा। आपके ही कर-कमलों द्वारा विश्व-प्रसिद्ध ‘ अर्थशास्त्र ‘ कौटिल्य अर्थशास्त्र नामक ग्रन्थ की रचना हुई। आचार्य चाणक्य पक्के कूटनीतिज्ञ थे। उन्हीं की नीतियों के फलस्वरूप भारतवर्ष एक परचम के नीचे संगठित हुआ।

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