Devutthana Ekadashi Vrat Katha / देवोत्थान एकादशी व्रत कथा

Devutthana Ekadashi Vrat Katha Aur Puja Vidhi
देवोत्थान एकादशी व्रत कथा और पूजा विधि


Devutthana Ekadashi Vrat Katha Aur Puja Vidhi, देवोत्थान एकादशी व्रत कथा और पूजा विधि :- कार्तिक शुक्ल पक्ष एकादशी को देवोत्थान या ‘देवउठनी’ एकादशी होती है।

देवोत्थान एकादशी पूजा विधि :-

इस दिन प्रातः काल स्नान आदि नित्य क्रिया के उपरान्त भगवान् विष्णु और माँ लक्ष्मी की पूजा करने और व्रत करने का विधि विधान है। इस दिन शालिग्राम और तुलसी की पूजा होती है और उनके विवाह का आयोजन भी किया जाता है।

देवोत्थान एकादशी व्रत कथा :-

एक समय की बात है। एक राजा के राज्य में सभी लोग एकादशी का व्रत रखा करते थे। यहाँ तक कि राज्य के पशु भी इस दिन अन्न ग्रहण नहीं करते थे। तभी उस राज्य में एक दूसरे राज्य से एक व्यक्ति आया। उसने कहा हे राजन् ! मुझे काम की आवश्यकता है। यदि मुझे आप नौकरी पर रख लें तो आपका बहुत आभार होगा।

राजा ने कहा ठीक, मैं तुम्हें नौकरी जरूर दूँगा, लेकिन एक शर्त माननी होगी। शर्त यह है कि इस राज्य में एकादशी व्रत करने की अनिवार्यता है, जिसका तुम्हें भी पालन करना होगा। इस दिन तुम अन्न ग्रहण नहीं कर सकते। व्यक्ति ने कहा कि मुझे आपकी शर्त मंजूर है।

कुछ दिनों बाद एकादशी आई और राज्य के सभी लोगों के साथ उस व्यक्ति ने भी एकादशी का व्रत किया। लेकिन जैसे-जैसे दिन गुजरता गया, उस व्यक्ति की भूख तेज होती चली गई। वह राजा के पास पहुँचा और राजा से कहने लगा कि हे राजन सिर्फ फल से मेरा पेट नहीं भर रहा है और मैं अन्न खाना चाहता हूँ अन्यथा मैं मर जाऊँगा।

यह सुनकर राजा ने उसे अन्न दे दिया। वह नित्य की तरह नदी पर पहुँचा और स्नान कर भोजन पकाने लगा। जब भोजन बन गया तो वह भगवान् को बुलाने लगा — आओ भगवान् ! भोजन तैयार है।

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