Dubdi Saatein Vrat Katha / दुबड़ी सातें व्रत कथा और पूजा

Dubdi Saatein Vrat Katha Aur Puja Vidhi
दुबड़ी सातें व्रत कथा और पूजा विधि


Dubdi Saatein Vrat Katha Aur Puja Vidhi, दुबड़ी सातें व्रत कथा और पूजा विधि :- दुबड़ी सातें त्यौहार भादों सुदी सातें को आता है। इस दिन दुबड़ी की पूजा की विधि-विधान पूर्वक करना चाहिए।

दुबड़ी सातें पूजा विधि :-

इस दिन दुबड़ी की पूजा करनी चाहिए। एक पट्टे पर दुबड़ी ( कुछ बच्चों की मूर्ति, सर्पों की मूर्ति, एक मटका और एक औरत का चित्र ) मिट्टी से बना लेवें। उनको चावल, जल, दूध, रोली, आटा, घी, चीनी, मिलाकर लोई बनाकर उनसे पूजें, दक्षिणा चढ़ावें और भीगा हुआ बाजरा चढ़ावें। मोठ बाजरे का बायना निकाल कर सासुजी को पाँय लगाकर दे देवें। फिर दुबड़ी सातें की कहानी सुनें। इस दिन ठंडा खाना, खाना चाहिए। यदि इसी साल किसी लड़की का विवाह हुआ हो तो वह उजमन ( उद्यापन ) करें। उजमन में मोठ बाजरे की 13 कुड़ी एक थाली में लेकर तथा 1 रूपया व एक साड़ी रखकर हाथ फेरकर अपनी सासुजी को पाँव लग कर दे देवें।

दुबड़ी सातें व्रत कथा :-

कथा के अनुसार एक साहूकार था। उसके सात बेटे थे। जब वह अपने किसी बेटे का विवाह करता उसी समय उसका वह बेटा मर जाता था। इस प्रकार उसके छह बेटे मर चुके थे। सबसे छोटा बेटा बाकी था। एक दिन की बात है कि छोटे बेटे का विवाह की बात चली, शादी तय हो गई। रिश्तेदारों को न्यौता भी भेज दिए गए। जब इस लड़के की बुआ आ रही थी। तो उसे रास्ते में एक बुढ़िया मिली। वह चक्की से आटा पीस रही थी। वहाँ लड़के की बुआ बैठ गई। बुढ़िया के पाँव लगी। बुढ़िया बोली — बेटा ! तू कहाँ जा रही है ? तब उसने सब हाल कह सुनाया। बुढ़िया बोली — वह तो घर से निकलने पर दरवाजा से दब कर मर जायेगा। अगर वहाँ से भी बच गया तो रास्ते में बरात रुकेगी वहाँ पेड़ गिर जायेगा, अगर वहाँ से बच गया तो ससुराल में दरवाजा गिरने पर दब कर मर जायेगा। अगर वहाँ भी न मरा तो सातवें भाँवर पर सर्प काट लेगा और वह मर जायेगा। यह बात सुनकर लड़के की बुआ कहने लगी — माँ, इसके बचने का कोई उपाय है ?तब बुढ़िया बोली — है तो सही, परन्तु कठिन है।

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