Ganesh Chaturthi Vrat Katha / गणेश चतुर्थी व्रत कथा

Ganesh Chaturthi Vrat Katha Aur Puja Vidhi
गणेश चतुर्थी व्रत कथा और पूजा विधि


Ganesh Chaturthi Vrat Katha Aur Puja Vidhi, गणेश चतुर्थी व्रत कथा और पूजा विधि :- गणेश चतुर्थी हिन्दुओं का एक प्रमुख त्यौहार है। यह त्यौहार भारत के विभिन्न भागों में बहुत ही धूम-धाम से मनाया जाता है किन्तु महाराष्ट्र में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। पुराणों के अनुसार इसी दिन गणेश का जन्म हुआ था। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चौथ को गणेश चतुर्थी का व्रत किया जाता है।

गणेश चतुर्थी पूजा विधि :-

प्रातःकाल स्नान आदि के उपरान्त गणेश जी की मृत्तिका मूर्ति बनाकर श्रद्धावनत हो पूजा करनी चाहिए। पूजन के समय मोदक का भोग लगाकर तथा हरित दूर्वा के 21 अंकुर लेकर उनमें से दो-दो करके इन दस नामों पर क्रमशः चढ़ाना चाहिए :-

  1. गणाधिप, 2. गौरीसुमन, 3. अघनाशक, 4. एकदन्त ।
  2. ईशपुत्र, 6. सर्वसिद्धिप्रद 7. विनायक भगवन्त ।।
  3. कुमारगुरु, 9. इभवक्त्राय 10. मूषकवाहन सन्त ।

करहु कृपा मुझ दास पर, पाप के भार अनन्त ।।

ततपश्चात् दस लड्डू ब्राह्मणों को दान देकर, ‘ दस ‘ लड्डू स्वयं खाना चाहिए।

गणेश चतुर्थी व्रत कथा :-

किसी समय भगवान् शंकर स्नान हेतु कैलास पर्वत से भोगवती नामक स्थान पर गये। उसी समय घर पर पार्वती ने स्नान करते समय अपने मैल का एक पुतला बनाकर सजीव कर दिया। उसी का नाम देवी ने गणेश रखा। गणेश को देवी ने आज्ञा दी कि तुम द्वार पर पहरा दो। किन्तु यह ध्यान रहे कि अन्दर कोई प्रवेश न न करने पावे। थोड़ी ही देर में शंकर जी आ गये और घर के अन्दर जाना चाहा। तभी गणेशजी ने उन्हें रोक दिया। इससे क्रोधित होकर शंकर ने त्रिशूल से उनका सर काट दिया।

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