Ganeshasya Ekvinshati Nampatha / गणेशस्य एकविंशति नामपाठः

Ganeshasya Ekvinshati Nampatha
गणेशस्य एकविंशति नामपाठः


ॐ गणञ्जयो गणपतिर्हेरम्बो धरणीधरः ।

महागणपतिर्लक्षप्रदः क्षिप्रप्रसादनः ।। 1 ।।

अमोघसिद्धिरमितो मन्त्रश्चिन्तामणिर्निधिः ।
सुमङ्गलो बीजमाशापूरको वरदः शिवः ।। 2 ।।

काश्यपो नन्दनो वाचासिद्धो ढुण्ढिविनायकः ।
मोदकैरेभिरत्रैकविंशत्या नामभिः पुमान् ।। 3 ।।

( उपायनं ददेद्भक्त्या मत्प्रसादं चिकीर्षति ।
वत्सरं विघ्नराजस्य तथ्यमिष्टार्थसिद्धये ।। )

यः स्तौति मद्गतमना मदाराधनतत्परः ।
स्तुतो नाम्नां सहस्त्रेण तेनाहं नात्र संशयः ।। 4 ।।

अर्थात् :- 1. गणंजय, 2. गणपति, 3. हेरम्ब, 4. धरणीधर, 5. महागणपति, 6. लक्षप्रद, 7. क्षिप्रप्रसादन, 8. अमोघसिद्धि, 9. अमित, 10. मन्त्र, 11. चिन्तामणि, 12. निधि, 13. सुमंगल, 14. बीज, 15. आशापूरक, 16. वरद, 17. शिव, 18. काश्यप, 19. नन्दन, 20. वाचासिद्ध तथा 21. ढुण्ढिविनायक – ये इक्कीस नाम मोदक हैं। जो पुरुष इन मोदक स्वरुप इक्कीस नामों द्वारा ( मुझे भक्ति-पूर्वक उपहार अर्पित करता है ; मेरा प्रसाद चाहता है और अभीष्ट-सिद्धि के लिये एक वर्ष तक मुझ विघ्नराज के इस यथार्थ स्तोत्र का पाठ करता है ; ) मुझे मन लगाकर, मेरी आराधना में तत्पर रहकर मेरा स्तवन करता है, उसके द्वारा सहस्त्रनामस्तोत्र से मेरी स्तुति हो जाती है, इसमें संशय नहीं है।

नमो नमः सुरवरपूजिताङ्घ्रिय
नमो नमो निरुपममङ्गलात्मने ।

नमो नमो विपुलपदैकसिद्धये
नमो नमः करिकलभाननाय ते ।। 5 ।।

अर्थात् :- श्रेष्ठ देवताओं द्वारा पूजित चरण वाले गणेश को नमस्कार है, नमस्कार है। अनुपम मंगलस्वरूप गणपति को बारम्बार नमस्कार है। एकमात्र जिनसे विपुलपद-परमधाम की सिद्धि होती है, उन गणाधीश को बारम्बार नमस्कार है। हे प्रभो ! गजशावक के समान मुखवाले आपको बारम्बार नमस्कार है।

।। इस प्रकार श्रीगणेशपुराण के अन्तर्गत उपासनाखण्ड में महागणपतिप्रोक्त गणेशजी इक्कीस नामों का पाठ सम्पूर्ण हुआ ।।

 

विभिन्न गणेशगायत्री

ॐ तत्पुरुषाय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि। तन्नो दन्ती प्रचोदयात् ।।
ॐ तत्कराटाय विद्महे हस्तिमुखाय धीमहि। तन्नो दन्ती प्रचोदयात् ।।
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि। तन्नो दन्ती प्रचोदयात् ।।
ॐ लम्बोदराय विद्महे महोदराय धीमहि। तन्नो दन्ती प्रचोदयात् ।।
ॐ महोत्कटाय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि। तन्नो दन्ती प्रचोदयात् ।।

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