Gopashtami Vrat Katha / गोपाष्टमी व्रत कथा और पूजा

Gopashtami Vrat Katha Aur Puja Vidhi
गोपाष्टमी व्रत कथा और पूजा विधि


Gopashtami Vrat Katha Aur Puja Vidhi, गोपाष्टमी व्रत कथा और पूजा विधि :- कार्तिक शुक्ल पक्ष की अष्टमी को ‘गोपाष्टमी‘ नाम से पुकारा जाता है। इस तिथि में गायों को स्नान कराके बछड़े सहित उनकी विधिवत् पूजा करनी चाहिए।

गोपाष्टमी पूजा विधि :-

प्रातःकाल स्नान आदि करने के उपरान्त गायों को स्नान कराके बछड़े सहित उनकी विधिवत् पूजा करनी चाहिए। जल, अक्षत, रोली, गुड़, जलेबी, वस्त्र तथा धूप-दीप से आरती उतार कर परिक्रमा करनी चाहिये। इसके पश्चात् भोजन करना चाहिए।

सांयकाल जब गाय चरकर घर लौटें, तब साष्टांग प्रणाम पूजन कर उनकी चरण-रज कर तिलक लगाना चाहिए। ऐसा करने से चिर सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इसी दिन भगवान् श्रीकृष्ण को भी जो-चारण के लिए वन में भेजा गया था। गोपाष्टमी का पूजा अवश्य करें। 

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