Guruvar Vrat Katha / गुरुवार व्रत कथा और पूजा विधि

Guruvar Vrat Katha Aur Puja Vidhi
गुरुवार व्रत कथा और पूजा विधि


Guruvar Vrat Katha Aur Puja Vidhi, गुरुवार व्रत कथा और पूजा विधि :- इस दिन भगवान् बृहस्पति की पूजा करने से धन, विद्या, पुत्र व अन्य मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।

गुरुवार पूजा विधि :-

इस दिन प्रातःकाल स्नान आदि करने के उपरान्त भगवान् बृहस्पति की पूजा करने के साथ व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इस दिन पीली गाय के घी से बनाये गये पदार्थों से ब्राह्मण-भोजन कराना चाहिए। इस दिन पीली वस्तुओं के दान तथा भक्षण का विशेष महत्त्व है। इस दिन पुरुष को बाल तथा दाढ़ी नहीं बनाना चाहिए।

स्त्रियों को बिना सर भिगोये स्नान करके केले के वृक्ष की पूजा करनी चाहिए। क्षत्रियों में गहरवार तथा चन्देले इस दिन कोई शुभ यात्रा नहीं करते। गुरु बृहस्पति की कहानी सुनकर दानादि देना चाहिए।

गुरुवार व्रत कथा :-

प्राचीन काल के समय की बात है। किसी राज्य में एक बड़ा प्रतापी और दानी राजा राज करता था। वह प्रत्येक गुरुवार को व्रत रखता एवं भूखे और गरीबों को दान देकर पुण्य प्राप्त करता था, परन्तु यह बात उसकी रानी को अच्छी नहीं लगती थी। वह न तो व्रत करती थी, न ही किसी को एक भी पैसा दान में देती थी और राजा को भी ऐसा करने से मना करती थी।

एक समय की बात है, रहा शिकार खेलने के लिए वन चले गए थे। घर पर रानी और दासी थी। उसी समय गुरु बृहस्पति देव साधु का रूप धारण कर राजा के दरवाजे पर भिक्षा मांगने आए, साधु ने जब रानी से भिक्षा माँगी तो वह कहने लगी, हे साधु महाराज, मैं इस दान और पुण्य से तंग आ गई हूँ। आप ऐसा कोई उपाय बताइये, कि जिससे सारा धन नष्ट हो जाये और मैं आराम से रह सकूँ।

बृहस्पति देव ने कहा, हे देवी, तुम बड़ी विचित्र हो, संतान और धन से कोई दुखी होता है। अगर अधिक धन है तो शुभ कार्यों में लगाओ, कुंवारी कन्याओं का विवाह कराओ, विद्यालय और बाग-बगीचे का निर्माण कराओ, जिससे तुम्हारे दोनों लोक सुधरे। परन्तु साधु की इन बातों का रानी पर कोई असर न हुआ। उसने कहा कि मुझे ऐसे धन की कोई आवश्यकता नहीं है, जिसे मैं दान दूँ और जिसे सँभालने में मेरा सारा समय नष्ट हो जाये।

तब साधु ने कहा — यदि तुम्हारी ऐसी इच्छा है तो मैं जैसा तुम्हें बताता हूँ तुम वैसा ही करना। गुरुवार के दिन तुम घर को गोबर से लीपना, अपने केशो को पिली मिट्टी से धोना, केशों को धोते समय स्नान करना, राजा से हजामत बनाने को कहना, भोजन में मांस मदिरा खाना, कपडा धोबी के यहाँ धुलने डालना। इस प्रकार सात बृहस्पतिवार करने से तुम्हारा सारा धन नष्ट हो जायेगा। इतना कहकर वह साधु अंतर्ध्यान हो गए।

साधु के अनुसार कही बातों को पूरा करते हुए रानी को केवल तीन बृहस्पतिवार ही बीते थे कि उसकी समस्त धन-संपत्ति नष्ट हो गई। भोजन के लिए राजा का परिवार तरसने लगा। तब एक दिन राजा ने रानी से बोला कि हे रानी, तुम यहीं रहो, मैं दूसरे देश को जाता हूँ, क्योंकि यहाँ पर सभी लोग मुझे जानते हैं। इसलिए मैं कोई छोटा कार्य नहीं कर सकता। ऐसा कहकर राजा परदेश चला गया। वहां वह जंगल से लकड़ी काटकर लाता और शहर में बेचता। इस तरह वह अपना जीवन व्यतीत करने लगा। इधर, राजा के परदेश जाते ही रानी और राजा दुखी रहने लगे।

एक बार जब रानी और दासी को सात दिनों तक बिना भोजन के रहना पड़ा, तो रानी ने अपनी दासी से कहा — हे दासी, पास ही के नगर में मेरी बहन रहती है। वह बड़ी धनवान है। तू उसके पास जा और कुछ ले आ, ताकि थोड़ी-बहुत गुजर-बसर हो जाए। दासी रानी की बहन के पास गई।

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2 thoughts on “Guruvar Vrat Katha / गुरुवार व्रत कथा और पूजा विधि”

    • राजीव जी आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।
      आपने अपना कीमती समय देकर हमारे वेबसाइट की सराहना की।
      हमारा प्रयास रहेगा, इस वेबसाइट को आपलोगों के लिए और बेहतर बना सकूँ।
      धन्यवाद।

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