Hartalika Teej Vrat Katha / हरतालिका तीज व्रत कथा

Hartalika Teej Vrat Katha Aur Puja Vidhi
हरतालिका तीज व्रत कथा और पूजा विधि


Hartalika Teej Vrat Katha Aur Puja Vidhi, हरतालिका तीज व्रत कथा और पूजा विधि :- हरतालिका व्रत भाद्र शुक्ल तृतीया को किया जाता है। सुहाग चाहने वाली स्त्रियों को इस दिन शंकर-पार्वती सहित बालू की मूर्ति बनाकर पूजन करना चाहिये। सुन्दर वस्त्रों और कदली-स्तम्भों से गृह को सजाकर नाना प्रकार के मंगल गीतों से रात्रि जागरण करना चाहिये। इस व्रत को करने वाली स्त्रियाँ पार्वती के समान सुख-पूर्वक पतिरमण करके शिवलोक को जाती हैं।

हरतालिका तीज पूजा विधि :-

इस व्रत के व्रती को शयन का निषेध है, इसके लिए उसे रात्रि में भजन कीर्तन के साथ रात्रि जागरण करना पड़ता है। प्रातःकाल स्नान करने के पश्चात् श्रद्धा एवं भक्ति पूर्वक किसी सुपात्र सुहागिन महिला को श्रृंगार सामग्री, वस्त्र, खाद्य सामग्री, फल, मिष्ठान्न एवम यथा शक्ति आभूषण का दान करना चाहिए। यह व्रत बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। प्रत्येक सौभाग्यवती स्त्री हरतालिका व्रत को रखने में अपना परम सौभाग्य समझती है।

हरतालिका तीज व्रत कथा :-

यह कथा शिवजी स्वयं पार्वती जी से कहती हैं। एक बार जब तुमने हिमालय पर्वत पर जाकर गंगा के किनारे, मुझको पति रूप में पाने के लिए कठिन तपस्या प्रारम्भ की थी उसी घोर तपस्या के समय नारद जी हिमालय के पास गये तथा विष्णु भगवान् आपकी कन्या के साथ विवाह करना चाहते हैं, इस कार्य के लिए मुझे भेजा है। यह नारद की बनावटी बात को तुम्हारे पिता ने स्वीकार कर लिया। तत्पश्चात् नारद जी विष्णु के पास गये और कहा कि आपका विवाह हिमालय ने पार्वती के साथ करने का निश्चय कर लिया है। आप इसकी स्वीकृति दें। नारद जी के जाने के पश्चात् पिता हिमालय ने तुम्हें भगवान् विष्णु के साथ निश्चित किया गया विवाह सम्बन्ध बतलाया। यह अनहोनी बात सुनकर तुम्हें अत्यन्त दुःख हुआ और तुम जोर-जोर से विलाप करने लगीं। एक सखी के द्वारा विलाप का कारण पूछे जाने पर तुमने सारा वृत्तांत्त कह सुनाया कि मैं इधर भगवान् शंकर के साथ विवाह करने के लिए कठिन तपस्या प्रारम्भ कर रही हूँ, उधर हमारे पिता जी विष्णु के साथ मेरा विवाह करना चाहते हैं। यदि तुम मेरी सहायता कर सको तो बोलो। अन्यथा मैं प्राण त्याग दूँगी।

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