Holika Dahan Katha / होलिका दहन कथा और पूजा विधि

होलिका दहन कथा और पूजा विधि
Holika Dahan Katha Aur Puja Vidhi


Holika Dahan Katha Aur Puja Vidhi, होलिका पर्व कथा और विधि पूजन महत्त्व :- यह त्यौहार फाल्गुन की पूर्णिमा को मनाया जाता है। यह हिन्दुओं का बहुत बड़ा त्यौहार है। इस दिन सभी स्त्री-पुरुष एवं बच्चे होली का पूजन करते हैं। पूजन करने के बाद होलिका को जलाया जाता है। इस पर्व पर व्रत भी करना चाहिए।

होली पूजा विधि :-

होली के दिन सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर पहले हनुमान जी, भैरों जी आदि देवताओं की पूजा करें। फिर उन पर जल, रोली,  मौली,चावल, फूल, प्रसाद, गुलाल, चन्दन, नारियल आदि चढ़ावें। दीपक से आरती करके दंडवत करें। फिर सबको रोली से तिलक लगा दें और जिन देवताओं को आप मानते हों उनकी पूजा करें। फिर थोड़े से तेल को सब बच्चों का हाथ लगाकर किसी चौराहे पर भैरों जी के नाम से ईंट पर चढ़ा देवें। यदि कोई लड़का हुए या लड़के के विवाह होने का उजमन करता होवे तो वह होली के दिन उजमन करे। उजमन में एक थाली में 13 जगह 4-4 पूड़ी और सीरा रखे। उन पर अपनी श्रद्धानुसार रूपये और कपडे ( साड़ी आदि ) तथा 13 गोबर की सुपारी की माला रखें। फिर उन पर हाथ फेरकर अपनी सासु जी को पाँय लगकर दे देवें। सुपारी की माला अपने घर में ही टाँग देवें।

इस दिन अच्छे-अच्छे भोजन, मिठाई नमकीन आदि पकवान बनावें। फिर थोड़ा-थोड़ा सभी सामान एक थाली में देवताओं के नाम का निकाल कर ब्राह्मणी को दे देवें। भगवान् का भोग लगाकर स्वयं भोजन कर लेवें।

होली की पूजा-विधि एवं सामग्री :-

पहले जमीन पर थोड़े गोबर और जल से चौका लगा लेवें। चौका लगाने के बाद एक सीधी लकड़ी ( डंडा ) के चारों तरफ गूलरी ( बड़कुल्ला ) की माला लगा देवें। उन मालाओं के आसपास गोबर की ढाल, तलवार, खिलौना आदि रख देवें। जो पूजन के समय नियत हो, उस समय जल,मोली, रोली, गुलाल, चावल, फूल, गुड़ आदि से पूजन करने के बाद ढाल, तलवार अपने घर में रख लेवें। चार जेल माला ( गुलरी की माला ) अपने घर में पितर जी, हनुमान जी, शीतला माता तथा घर के नाम की उठाकर अलग रख देवें। यदि आपके यहाँ घर में होली न चलती हो तो सब और यदि होली घर में ही जलाते हों तो एक माला, ऊख, पूजा की समस्त सामग्री, कच्चे सूत की कुकड़ी, जल का लोटा, नारियल, बूट ( कच्चे चने की डाली ), पापड़ आदि सब सामान गाँव या शहर की होली जिस स्थान पर जलती हो वहाँ ले जावें।

वहाँ जाकर डंडी होली का पूजन करें। जेल माला, नारियल आदि चढ़ा देवें। परिक्रमा देवें, पापड़, बूट आदि होली जलने पर भून लेवें और सबों में बाँटकर खा लेवें। उसे घर वापिस ले आवें। यदि घर पर होली जलावें तो गाँव या शहर वाली होली में से ही अग्नि लाकर घर की होली जलावें। फिर घर आकर पुरुष अपने घर की होली पूजन करने के बाद जलावें। घर की होली में अग्नि लगाते ही उस डंडा या लकड़ी को बाहर निकाल लेवें। इस डंडे को भक्त प्रह्लाद मानते हैं। स्त्रियां होली जलते ही एक घण्टी से सात बार जल का अर्घ्य देकर रोली-चावल चढ़ावें। फिर होली के गीत तथा बधाई गावें। पुरुष घर की होली में बूँट और जौ की बाल, पापड़ आदि भूनकर तथा उन्हें बाँटकर खा लेवें। होली-पूजन के बाद बच्चे तथा पुरुष रोली से तिलक ( टीका ) लगावें। छोटे अपने सभी बड़ो के पाँय छूकर आशीर्वाद लेवें।

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