Indira Ekadashi Vrat Katha / इंदिरा एकादशी व्रत कथा

Indira Ekadashi Vrat Katha Aur Puja Vidhi
इंदिरा एकादशी व्रत कथा और पूजा विधि


Indira Ekadashi Vrat Katha Aur Puja Vidhi, इंदिरा एकादशी व्रत कथा और पूजा विधि :- आश्विन कृष्ण पक्ष की एकादशी ‘ इन्दिरा एकादशी ‘ कहलाती है। एकादशी पर्व में इन्दिरा एकादशी का बहुत महत्त्व है। इस दिन शालग्राम की पूजा कर व्रत करने का विधि विधान है।

इंदिरा एकादशी पूजा विधि :-

इंदिरा एकादशी के दिन प्रातःकाल स्नान आदि करने के उपरान्त शालग्राम का पूजा कर व्रत करने की विधि-विधान है। पवित्र होकर शालग्राम को पंचामृत से स्नान कराकर वस्त्र पहनावें। भोग लगावें तथा पूजा-आरती करें। पंचामृत वितरण कर, ब्राह्मण-भोजन कराकर दान-दक्षिणा दें। इस दिन शालग्राम पर तुलसी दल अवश्य चढ़ाना चाहिए। इस प्रकार जो इस व्रत को करते हैं वे करोड़ों पितरों का उद्धार कर स्वयं स्वर्गलोक जाते हैं।

इंदिरा एकादशी व्रत कथा :-

एक समय राजा इन्द्रसेन माहिष्मती नगरी में राज्य करते थे। उनके माता-पिता दिवंगत हो चूके थे। अकस्मात् एक दिन उन्हें स्वप्न हुआ कि तुम्हारे माता-पिता यमलोक में कष्ट भोग रहे हैं।

निद्राभंग होने पर वे चिन्तित हुए कि किस प्रकार इस यातना से पितरों को मुक्त किया जाए। इस विषय पर मंत्री से परामर्श किया। मंत्री ने विद्वानों को बुलाकर पूछने की स्वीकृति दी। राजा ने ऐसा ही किया। सभी ब्राह्मणों के उपस्थित होने पर स्वप्न की बात पेश की गई। ब्राह्मणों ने कहा – राजन् !

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