Jaya Ekadashi Vrat Katha / जया एकादशी व्रत कथा और पूजा

Jaya Ekadashi Vrat Katha Aur Puja Vidhi
जया एकादशी व्रत कथा और पूजा विधि


Jaya Ekadashi Vrat Katha Aur Puja Vidhi, जया एकादशी व्रत कथा और पूजा विधि :- माघ शुक्ल पक्ष एकादशी को जया एकादशी का व्रत किया जाता है।

जया एकादशी पूजा विधि :-

इस तिथि को भगवान् केशव ( कृष्ण ) की पुष्प, जल, अक्षत, रोली तथा विशिष्ट सुगन्धित द्रव्यों से पूजन करके आरती उतारनी चाहिए। भगवान् को भोग लगाये गये प्रसाद को भक्त स्वयं खायें।

जया एकादशी व्रत कथा :-

एक समय की बात है। इन्द्र की सभा में एक गन्धर्व गीत गा रहा था, परन्तु उसका मन अपनी नवयौवना सुन्दरी में आसक्त था। अतएव स्वर-लय भंग हो रहा था। यह बात इन्द्र को बहुत बुरी तरह खटकी, तब उन्होंने क्रोधित होकर कहा — हे दुष्ट गन्धर्व ! तू जिसकी याद में मस्त है वह राक्षसी हो जायेगी।

यह शाप सुनकर वह गन्धर्व बहुत घबराया और इन्द्र से क्षमा-याचना करने लगा। इन्द्र के कुछ न बोलने पर वह घर चला आया, यहाँ आकर देखने पर उसकी पत्नी सचमुच पिशाचिनी रूप में मिली।

शाप-निवृत्ति के लिए उसने करोड़ों यत्न किए, परन्तु सब असफल रहे, अंत में हार कर बैठ गया। अकस्मात् एक दिन उसका साक्षात्कार ऋषि नारद से हो गया।

नारद ने गन्धर्व से दुःख का कारण पूछा। गन्धर्व ने सब बातें यथावात् बता दीं। यह सुनकर नारद ने माघ शुक्ल पक्ष की जया-एकादशी का व्रत तथा भगवत्कीर्तन करने को कहा। गन्धर्व ने एकादशी का व्रत किया जिसके प्रभाव से उसकी पत्नी अत्यन्त सौंदर्यवाली हो गई।

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