Kamada Ekadashi Vrat Katha / कामदा एकादशी व्रत कथा

Kamada Ekadashi Vrat Katha Aur Puja Vidhi
कामदा एकादशी व्रत कथा और पूजा विधि


Kamada Ekadashi Vrat Katha Aur Puja Vidhi, कामदा एकादशी व्रत कथा और पूजा विधि :- कामदा एकादशी चैत्र शुक्ल पक्ष की एकादशी को कहते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दिन व्रत-पूजन करने से अधूरी मनोकामनाएं विष्णु भगवान पूरी करते हैं। इसलिए इसे फलदा एकादशी या कामदा एकादशी कहा जाता है।

कामदा एकादशी व्रत पूजा विधि महत्त्व :-

कामदा एकादशी के दिन भगवान् विष्णु की पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन व्रत करने से हर तरह के दुख और कष्टों से मुक्ति मिलती है। ऐसी मान्यता है कि कामदा एकादशी के दिन व्रत-पूजन करने से अधूरी मनोकामनाएं विष्णु भगवान् पूरी करते है इसलिए इसे फलदा एकादशी या कामदा एकादशी भी कहा जाता है। अगर आपका पति या बच्चा बुरी आदतों का शिकार हो तो भी कामदा एकादशी का व्रत रख सकते हैं।

कामदा एकादशी की व्रत कथा :-

प्राचीन काल में ‘ नागलोक ‘ में राजा पुण्डरीक राज्य करता था। उस विलासी की सभा में अप्सराएँ, किन्नर, गंधर्व नृत्य किया करते थे। 

एक बार ललित नामक गंधर्व जब उसकी राजसभा में नृत्य-गान कर रहा था तो सहसा उसे अपनी सुन्दरी स्त्री की याद आ गई, जिसके कारण उसके नृत्य-गीत-लय वादिता में अरोचकता आ गई। कर्कट नामक नाग यह बात जान गया तथा राजा से कह सुनाया। इस पर क्रोधातुर होकर पुण्डरीक नागराज ने ललित को राक्षस हो जाने का श्राप दे दिया। ललित सहस्त्रों वर्ष तक राक्षस योनि में अनेक लोकों में घूमता रहा। इतना ही नहीं, उसकी सहधर्मिणी ललिता भी भी उन्मत्त वेश में उसी का अनुकरण करती रही।

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