Mahashivratri Vrat Katha / महाशिवरात्रि व्रत कथा और पूजा

Mahashivratri Vrat Katha Aur Puja Vidhi
महाशिवरात्रि व्रत कथा और पूजा विधि


Mahashivratri Vrat Katha Aur Puja Vidhi, महाशिवरात्रि व्रत कथा और पूजा विधि :- फाल्गुन कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को शिवरात्रि का महोत्सव मनाया जाता है। त्रयोदशी को एक बार भोजन करके चतुर्दशी को दिन भर अन्न न ग्रहण करना चाहिए।

महाशिवरात्रि पूजा विधि :-

काले तिलों से स्नान करके रात्रि में विधिवत् शिव-पूजन करना चाहिए। शिवजी के सबसे प्रिय पुष्पों में मदार, कनेर, बेलपत्र तथा मौलसरी हैं। किन्तु पूजन-विधान में बेलपत्र सबसे प्रमुख है। शिवजी पर पका आम चढाने से विशेष फल प्राप्त होता है।

शिवलिंग पर चढ़ाये गये पुष्प, फल तथा जल को नहीं ग्रहण करना चाहिए।

महाशिवरात्रि व्रत कथा :-

प्राचीन समय में एक नृशंस बहेलिया था जो नित्य प्रति अनगिनत निरपराध जीवों को मारकर अपने परिवार -पोषण करता था।

एक बार पुरे जंगल में विचरण करने पर भी जब उसे कोई शिकार न मिला तो क्षुधाकुल एक तालाब के किनारे रहने लगा। उसी स्थान पर एक बेल वृक्ष के नीचे शिवलिंग भी स्थापित था। बहेलिया उसी वृक्ष की डाल पर चढ़कर अपनी आवासस्थली बनाने के लिए, बेलपत्रों को तोड़ता हुआ शिवलिंग को आच्छादित कर दिया। दिन भर की भूख से व्याकुल उस बहेलिये का एक प्रकार से शिवरात्रि व्रत पूरा हो गया।

कुछ रात बीत जाने पर एक गाभिन हिरनी उधर कुलाँचे भरती आई। उसे देखते ही बहेलिया ने निशाना लगाया। झिझकती, भयाकुल हिरनी दीन वाणी में बोली — हे व्याध ! मैं अभी गाभिन हूँ, प्रसव बेला भी समीप है ; इसलिए इस समय मुझे मत मारो, प्रजनन क्रिया के बाद शीघ्र ही आ जाऊँगी। “

बहेलिया उसकी बातों को मान गया। थोड़ी रात व्यतीत होने पर एक दूसरी मृगी उस स्थान पर आई। पुनः बहेलिये के निशाना साधते ही उस मृगी ने भी निवेदन किया कि ” मैं अभी ऋतुक्रिया से निवृत्त सकामा हूँ इसलिए मुझे पति-समागम करने दीजिये, मारिये नहीं ! मैं मिलन पश्चात् स्वयं तुम्हारे पास आ जाऊँगी। ” बहेलिया ने उसकी भी बात को स्वीकार कर लिया।

रात्रि के तृतीय पहर में एक तीसरी हिरनी छोटे-छोटे छौनों को लिये उसी जलाशय में पानी पीने आई। बहेलिया ने उसको भी देखकर धनुष बाण चढ़ा लिया। तब वह हिरनी कातर स्वर में बोली — ” हे व्याध ! मैं इन छौनों को हिरन के संरक्षण में कर आऊं तो तब मुझे मार डालना। ” बहेलिया दीन वचनों से प्रभावित होकर उसे भी छोड़ दिया।

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