Malmas Vrat Katha / मलमास व्रत कथा

Malmas Vrat Katha Aur Puja Vidhi
मलमास व्रत कथा और पूजा विधि


Malmas Vrat Katha Aur Puja Vidhi, मलमास व्रत कथा और पूजा विधि :- संक्रान्तिहीन चान्द्रमास होता है अर्थात् जिस चान्द्रमास में सूर्य की संक्रान्ति नहीं होती, वह मलमास या अधिमास कहा जाता है।

मलमास पूजा विधि :-

मलमास पर भगवान् शंकर की उपासना का विशेष माहात्म्य है। इसमें कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता। भगवान् शंकर के अशिव रूप की वन्दना करते हुए भक्त लोग मलमास तक शिव लिंग पर जल, बेल-पत्र, धतूरा तथा पुष्प आदि चढ़ाते हैं।

मलमास व्रत कथा :-

कथा के अनुसार, स्वामीविहीन होने के कारण अधिकमास को ‘ मलमास ‘ कहने से उसकी बड़ी निंदा होने लगी। इस बात से दुःखी होकर मलमास श्रीहरि विष्णु के पास गया और उनसे दुखड़ा रोया।

भक्तवत्सल श्रीहरि उसे लेकर गोलोक पहुँचे। वहाँ श्रीकृष्ण विराजमान थे। करुणासिन्धु भगवान् श्रीकृष्ण ने मलमास की व्यथा जानकर उसे वरदान दिया — अब से मैं तुम्हारा स्वामी हूँ। इससे मेरे सभी दिव्य गुण तुम में समाविष्ट हो जाएंगे। मैं पुरुषोत्तम के नाम से विख्यात हूँ और मैं तुम्हे अपना यही नाम दे रहा हूँ। आज से तुम मलमास के बजाय पुरुषोत्तम मास के नाम से जाने जाओगे।

इसलिए प्रति तीसरे वर्ष में तुम्हारा आगमन पर जो व्यक्ति श्रद्धा-भक्ति के साथ कुछ अच्छे कार्य करेगा, उसे कई गुना पुण्य मिलेगा। इस प्रकार भगवान् ने अनुपयोगी हो चुके अधिकमास को धर्म और कर्म के लिए उपयोगी बना दिया।

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