Mangal Kamna Mantra / मंगल कामना मंत्र

Mangal Kamna Mantra
मंगल कामना मंत्र


अविरलमदधाराधौतकुम्भः शरण्यः

फणिवरवृतगात्रः सिद्धसाध्यादिवन्द्यः ।

त्रिभुवनजनविघ्नध्वान्तविध्वंसदक्षो
वितरतु गजवक्त्रः सन्ततं मङ्गलं वः ।। 1 ।।

अर्थात् :- जिनका कुम्भस्थल निरन्तर बहने वाली मदधारा से धुला हुआ है ; जो सबके शरणदाता हैं ; जिनके शरीर में बड़े-बड़े सर्प लिपटे रहते हैं ; जो सिद्ध और साध्य आदि देवताओं के वन्दनीय हैं तथा तीनों लोकों के निवासीजनों के विघ्नान्धकार का विध्वंस करने में दक्ष ( चतुर ) हैं, वे गजानन गणेश आपलोगों को सदा मंगल प्रदान करें।

अशेषविघ्नप्रतिषेधदक्षमन्त्राक्षतानामिव दिङ्मुखेषु ।
विक्षेपलीला करशीकराणां करोतु वः प्रीतिमिभाननस्य ।। 2 ।।

अर्थात् :- श्रीगजानन के शुण्ड से सम्पूर्ण दिशाओं में जो जलकणों के छींटे डालने की लीला होती है, वह समस्त विघ्नों के निवारण में समर्थ मन्त्राक्षपात-सी प्रतीत होती है ; वह लीला आपलोगों को प्रसन्नता प्रदान करे।

उच्चैरुत्तालगण्डस्थलबहुलगलद्दानपानप्रमत्त-
स्फीतालिव्रातगीतिश्रुतिविधृतिकलोन्मीलितार्धाक्षिपक्ष्मा ।

भक्तप्रत्यूहपृथ्वीरूहनिवहसमुन्मूलनोच्चैरुदञ्च-
च्छुण्डादण्डाग्र उग्रार्भक इभवदनो वः स पायादपायात् ।। 3 ।।

अर्थात् :- जिनके अत्यन्त उन्नत गण्डस्थल पर बहती हुई प्रचुर मदधारा के पान से मत्त हुए झुंड-के-झुंड भ्रमर गुंजार करते हैं और उस कलरव को सुनकर जो आनन्दातिरेक से अपनी आँखें अधमुँदी कर लेते हैं ; जिनके शुण्डादण्ड का अग्रभाग भक्तों के विघ्नरूपी वृक्ष-समूहों को जड़-मूलसाहित उखाड़ फेंकने के लिये ऊँचा उठा हुआ है, वे रुद्रकुमार गजानन आपलोगों को विनाश एवं संकट से बचायें।

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