Margashirsha Purnima Vrat Katha / मार्गशीर्ष पूर्णिमा व्रत

Margashirsha Purnima Vrat Katha Aur Puja Vidhi
मार्गशीर्ष पूर्णिमा व्रत कथा और पूजा विधि


Margashirsha Purnima Vrat Katha Aur Puja Vidhi, मार्गशीर्ष पूर्णिमा व्रत कथा और पूजा विधि :- यह व्रत मार्गशीर्ष की पूर्णिमा को होता है। इस दिन भगवान् नारायण की पूजा की जाती है।

मार्गशीर्ष पूर्णिमा पूजा विधि :-

सबसे पहले नियमपूर्वक पवित्र होकर स्नान करें और सफ़ेद कपडे पहिने, फिर आचमन करें। इसके बाद व्रत रखने वाले ‘ ॐ नमो नारायणाय ‘ कहकर आवाहन करें तथा आसन और गन्ध-पुष्प आदि भगवान् को अर्पण करें। भगवान् के सामने चौकोर वेदी बनावें जिसकी लम्बाई व चौड़ाई एक-एक हाथ हो। हवन करने के लिए अग्नि स्थापित करें और उसमें तेल, घी, शक्कर आदि की आहुति दें।

हवन की समाप्ति के बाद फिर भगवान् का पूजन करें और अपना व्रत उनेक अर्पण करें और कहें —

पौर्णमास्यां निराहारः स्थिता देव तवाज्ञया
भोक्ष्यामि पुण्डरीकाक्ष परेह्नि शरणं भव

अर्थात् हे देव पुण्डरीकाक्ष ! मैं पूर्णिमा को निराहार व्रत रखकर दूसरे दिन आपकी आज्ञा से भोजन करूँगा। आप मुझे अपनी शरण देवें।

इस प्रकार भगवान् को व्रत समर्पित करके सांयकाल चन्द्रमा निकलने पर दोनों घुटने पृथ्वी पर टेक सफ़ेद फूल, अक्षत, चन्दन, जल सहित अर्घ्य देवें। अर्घ्य देते समय चन्द्रमा से कहें —

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