Navratri Vidhi Pujan / नवरात्रि विधि पूजन

Navratri Vidhi Pujan
नवरात्रि विधि पूजन


Navratri Vidhi Pujan, नवरात्रि विधि पूजन :- आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक यह व्रत मनाया जाता है।

नवरात्रि पूजा विधि :-

आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा के दिन प्रातः अभ्यंग स्नानादि करके संकल्प करें तथा स्वयं या पंडितों द्वारा मिट्टी की वेदी बनाकर जौ बोना चाहिए। उसी पर घट स्थापन करें। घट के ऊपर कुल-देवी की प्रतिमा स्थापित कर उसका पूजन करें तथा ‘ दुर्गासप्तशती ‘ का पाठ करायें। पाठ पूजन के समय दीप अखण्ड जलता रहना चाहिए।

वैष्णव लोग राम भगवान् की मूर्ति स्थापित कर रामायण का पाठ करते हैं। कहीं कहीं नवरात्र पर रामलीलाएं भी हुआ करती है।

नवरात्रि स्तुति :-

मंगल की सेवा सुन मेरी देवा हाथ जोड़ कर तेरे द्वार खड़े ।
पान सुपारी ध्वजा नारियल ले ज्वाला तेरे भेंट धरे ।।

सुन जगदम्बे कर न विलम्बे सन्तन की भण्डार भरे ।
सन्तन प्रतिपाली सदा कुशाली जय काली कल्याण करे ।।

बुद्धि विधाता तू जगमाता मेरा कारज सिद्ध करे ।
चरण कमल का लिया आसरा शरण तुम्हारी आन परे ।।

जब-जब भीड़ पड़ी भक्तन पर तब-तब आय सहाय करे ।
सन्तन सुखदाई सदा सहाई सन्त खड़े जयकार करे ।। 1 ।।

बार-बार तैं सब जग मोह्यो तरुणी रूप अनूप धरे ।
माता होकर पुत्र खिलावें कहीं भार्या भोग करे ।।
सन्तन सुखदाई सदा सहाई सन्त खड़े जयकार करे ।। 2 ।।

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