Padmanabh Dwadashi Vrat Katha / पद्मनाभ द्वादशी व्रत कथा

Padmanabh Dwadashi Vrat Katha Aur Puja Vidhi
पद्मनाभ द्वादशी व्रत कथा और पूजा विधि


Padmanabh Dwadashi Vrat Katha Aur Puja Vidhi, पद्मनाभ द्वादशी व्रत कथा और पूजा विधि :- यह व्रत आश्विन शुक्ल पक्ष को किया जाता है। इस तिथि को भगवान् पद्मनाभ की पूजा की जाती है। इस दिन भगवान् जाग्रतवस्था प्राप्त करने के लिए अँगड़ाई भरते हैं तथा पद्मासीन ब्रह्मा ‘ ॐ कार ‘ ध्वनि करते हैं।

पद्मनाभ द्वादशी पूजा विधि :-

इस दिन प्रातः काल स्नान आदि करने के उपरांत व्रत करने का संकल्प लें। इस दिन भगवान् पद्मनाभ की पूजा और व्रत करने का विधि-विधान है। सर्वप्रथम भगवान् की प्रतिमा को दूध से स्नान कराके भोग लगावें तथा धूप, दीप, नैवेद्य, चन्दन से आरती उतारें। ब्राह्मणों को यथाशक्ति भोजन कराएं एवं दान दक्षिणा दें।

पद्मनाभ द्वादशी व्रत कथा :-

भगवान् श्रीकृष्ण ने पद्मनाभ द्वादशी की कथा हस्तिनापुर अधिपति, महाराज युधिष्ठिर को बतलाई थी। श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर से कहा था कि — हे महाराज युधिष्ठिर आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को जो भक्त उपवास करके पद्मनाभ नाम से मेरी आराधना करता है उसको एक हजार गोदान के बराबर फल प्राप्त होता है। पद्मनाभ द्वादशी का व्रत कर विधि-विधान से पूजा करने पर मानव  इच्छाएं इस लोक में पूरी होती है और देहवसान के बाद उसको मोक्ष की प्राप्ति होती है।

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