Padmini Ekadashi Vrat Katha / पद्मिनी एकादशी व्रत कथा

Padmini Ekadashi Vrat Katha Aur Puja Vidhi
पद्मिनी एकादशी व्रत कथा और पूजा विधि


Padmini Ekadashi Vrat Katha Aur Puja Vidhi, पद्मिनी एकादशी व्रत कथा और पूजा विधि :- मलमास या पुरुषोत्तम मास की कृष्ण एकादशी को पद्मिनी एकादशी कहते हैं। इसमें राधा-कृष्ण तथा शिव-पार्वती के पूजन का विधान है।

पद्मिनी एकादशी पूजन विधि :-

इस दिन प्रातः काल स्नान आदि करने के उपरान्त राधा-कृष्ण तथा शिव-पार्वती के पूजा के साथ व्रत का संकल्प लें। धूप, दीप, पुष्प, नैवेद्य आदि से भगवान् की पूजा अर्चना करें।

पद्मिनी एकादशी व्रत कथा :-

लंकापति रावण जब दिग्विजय करने निकला तो वह कार्त्तवीर्य सहस्रार्जुन से पराजित हो गया। इस प्रकार बहुत दिनों तक वह उसके कारागार में बन्दी रहा। अन्त में अगस्त्य मुनि की अनुशंसा से जेल-मुक्त हुआ। देवर्षि नारद को इस पराजय से बड़ी प्रसन्नता हुई। उन्होंने पुलस्त्य मुनि से ही रावण की हार का कारण पूछा।

मुनि ने बताया कि कार्त्तवीर्य अर्जुन को पराजित करने की शक्ति विष्णु के सिवा किसी अन्य में नहीं है। कारण यह है कि इसकी माता पद्मिनी तथा पिता कृतवीर्य ने पुत्रकामना से गंधमादन पर्वत पर अनेक वर्षों तक कठोर तपस्या की थी, तथा महासती अनसूया देवी के कहने पर उन लोगों ने इसी पद्मिनी नामक एकादशी का व्रत किया था। उनके व्रत से प्रसन्न होकर भगवान् विष्णु ने स्वयं दर्शन दिया था और उन्हें अर्जुन जैसे परम वीर पुत्र तथा अजेय होने का वरदान भी दिया था। यही कारण है कि उससे रावण को भी पराजित होना पड़ा।

पूजा और व्रत कथा पढ़ने के उपरान्त राधा-कृष्ण और शिव-पार्वती चालीसा तथा आरती अवश्य पढ़ें :-

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