Parama Ekadashi Vrat Katha / परमा एकादशी व्रत कथा और पूजा

Parama Ekadashi Vrat Katha Aur Puja Vidhi
परमा एकादशी व्रत कथा और पूजा विधि


Parama Ekadashi Vrat Katha Aur Puja Vidhi, परमा एकादशी व्रत कथा और पूजा विधि :- पुरुषोत्तम मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी का नाम हरिवल्लभा एकादशी है।

परमा एकादशी पूजा विधि :-

इस दिन प्रातः काल स्नान आदि करने के उपरान्त भगवान् विष्णु की पूजा के साथ व्रत का संकल्प लें। भगवान् को धूप, दीप, नैवेद्य, पुष्प, गंध आदि से पूजन करें।

परमा एकादशी व्रत कथा :-

प्राचीनकाल में बभ्रुवाहन नामक एक दानी तथा प्रतापी राजा था। वह प्रतिदिन ब्राह्मणों को सौ गौएँ दान करता था। उसी के राज्य में प्रभावती नाम की एक बाल-विधवा ब्राह्मणी भी रहती थी, जो भगवान् विष्णु की परम उपासिका थी। पुरुषोत्तम मास में नित्य स्नान कर विष्णु तथा शंकर की पूजा करती थी। परमा एकादशी का व्रत भी इसी बीच वह निरन्तर करती रही।

दैवयोग से राजा बभ्रुवाहन और बाल-विधवा ब्राह्मणी की एक दिन मृत्यु हुई और दोनों साथ ही धर्मराज के दरबार में पहुँचे। धर्मराज ने उठकर जितना स्वागत ब्राह्मणी प्रभावती का किया उतना राजा का नहीं किया। राजा को अपने दान-पुण्य पर जो भरोसा था उसके प्रतिकूल अपना अपमान तथा ब्राह्मणी का सम्मान देखकर वे आश्चर्यचकित रह गये। इसी समय चित्रगुप्त ने आकर प्रभावती तथा राजा के कर्मानुसार विष्णुलोक तथा स्वर्गलोक की बात सुनाई। राजा को इस पर और भी आश्चर्य हुआ तब उसने धर्मराज से इसका कारण पूछा। धर्मराज ने प्रभावती द्वारा परमा एकादशी के व्रत को पूर्ण करने का कारण बताया।

पूजा और व्रत कथा करने के उपरान्त भगवान् विष्णु और माँ लक्ष्मी की चालीसा तथा आरती अवश्य पढ़ें :-

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