Paush Purnima Vrat Katha / पौष पूर्णिमा व्रत कथा और पूजा

Paush Purnima Vrat Katha Aur Puja Vidhi
पौष पूर्णिमा व्रत कथा और पूजा विधि


Paush Purnima Vrat Katha Aur Puja Vidhi, पौष पूर्णिमा व्रत कथा और पूजा विधि :- यह स्नान पौष की पूर्णिमा से शुरू होता है।

पौष पूर्णिमा पूजा विधि :-

इस दिन से ही माघ के पवित्र स्नान का शुभारम्भ होता है। इस दिन सूर्य निकलने से पहले शुद्ध जल ( नदी, तालाब, कुआँ, बावड़ी ) में स्नान करना चाहिये और  भगवान मधुसूदन की पूजा करना चाहिये। फिर ब्राह्मणों को भोजन कराकर दान देवें। इससे भगवान् मधुसूदन प्रसन्न होते हैं और अन्त में स्वर्ग में स्थान देते हैं।

जो इस स्नान को करते हैं वे देव-विमानों में बैठकर विहार करने के अधिकारी होते हैं। यह माघ मास के स्नान का फल पुण्यवान पुरुष को प्राप्त होता है।

पौष पूर्णिमा व्रत कथा :-

पौराणिक कथा के अनुसार, पृथ्वी पर दुर्गम नामक दैत्य ने आतंक का माहौल पैदा किया। इस तरह करीब सौ वर्ष तक वर्षा न होने के कारण अन्न-जल के अभाव में भयंकर सूखा पड़ा, जिससे लोग मर रहे थे। जीवन ख़त्म हो रहा था।

उस दैत्य ने ब्रह्माजी से चारों वेद चुरा लिए थे। तब आदिशक्ति माँ दुर्गा का रूप माँ शाकम्भरी देवी में अवतरित हुई, जिनके सौ नेत्र थे। उन्होंने रोना शुरू किया, रोने पर आँसू निकले और इस तरह पूरी धरती में जल का प्रवाह हो गया। अंत में माँ शाकम्भरी दुर्गम दैत्य का अंत कर दिया।

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