Pitra Visarjan Amavasya Vrat Katha / पितृ विसर्जन अमावस्या

Pitra Visarjan Amavasya Vrat Katha Aur Puja Vidhi
पितृ विसर्जन अमावस्या व्रत कथा और पूजा विधि


Pitra Visarjan Amavasya Vrat Katha Aur Puja Vidhi, पितृ विसर्जन अमावस्या व्रत कथा और पूजा विधि :- आश्विन अमावस्या ही पितृ-विसर्जन अमावस्या के नाम से पुकारी जाती है। इस दिन ब्राह्मण-भोजन तथा दानादि से पितर तृप्त होते हैं। ऐसी मान्यता है कि विसर्जन के समय वे अपने पुत्रों को आशीर्वाद देकर जाते हैं।

पितृ विसर्जन अमावस्या पूजा विधि :-

इस दिन सुबह स्नान आदि के उपरान्त पितरों की पूजा करें। इस दिन ब्राह्मण-भोजन तथा दानादि से पितर तृप्त होते हैं। इस दिन शाम को दीपक जलाने की बेला में पूड़ी-पकवान आदि खाद्य पदार्थ दरवाजे पर रखे जाते हैं, जिसका अर्थ यह है कि पिता जाते समय भूखे न जायँ। इसी तरह दीपक जलाने का आशय उनके मार्ग को आलोकित करने का है।

पितृ विसर्जन अमावस्या व्रत कथा :-

पौराणिक घटना के अनुसार देवताओं के पितृगण ‘ अग्निष्वात्त ‘ जो सोमपथ लोक मे निवास करते हैं। उनकी मानसी कन्या, ‘ अच्छेदा ‘ नाम की एक नदी के रूप में अवस्थित हुई। एक बार अच्छोदा ने एक हज़ार वर्ष तक निर्बाध तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर दिव्यशक्ति परायण देवताओं के पितृगण ‘ अग्निष्वात्त ‘ अच्छोदा को वरदान देने के लिए दिव्य सुदर्शन शरीर धारण कर आश्विन अमावस्या के दिन उपस्थित हुए।

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