Ravivar Vrat Katha / रविवार व्रत कथा और पूजा विधि

Ravivar Vrat Katha Aur Puja Vidhi
रविवार व्रत कथा और पूजा विधि


Ravivar Vrat Katha Aur Puja Vidhi, रविवार व्रत कथा और पूजा विधि :- सप्ताह के प्रत्येक रविवार को भगवान् सूर्य की उपासना, पूजा-अर्चना और व्रत का विधि-विधान है।

रविवार पूजा विधि :-

सात दिन व्रत रहकर भगवान् सूर्य की पूजा लाल चन्दन तथा लाल पुष्प से करनी चाहिये। रविवार व्रत रहने वाले को नमक, तेल नहीं खाना चाहिए। इस प्रकार नियमित व्रत रहने से दाद, कोढ़, आँख पीड़ा आदि असाध्य रोगों से छुटकारा मिल जाता है। अर्घ्यदानादि देने के पश्चात् सूर्य की कथा सुननी चाहिये। 

रविवार व्रत कथा :-

प्राचीन कथा के अनुसार एक बूढी औरत थी। वह नियमित रूप से रविवार व्रत करती थी। वह बूढी औरत रविवार के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नानादि से निवृत होकर, आँगन को गोबर से लीपकर, स्वच्छ करती तदोपरांत सूर्य भगवान् की पूजा करती तथा कथा सुनकर सूर्य भगवान् को भोग लगाकर दिन में एक समय भोजन करती थी। इसी तरह रविवार का व्रत करती। सूर्य भगवान् की कृपा से बूढी औरत को किसी प्रकार की कोई चिन्ता व कष्ट नहीं था। उसका घर धन-धान्य से भरा हुआ था। उस बूढी औरत को सुखी देख उसकी पड़ोसन उससे बहुत जलती थी। बुढ़िया रोजाना पड़ोसन के घर का गोबर लाती और अपना घर लीपती।

शनिवार के दिन रात को पड़ोसन ने अपनी गाय को घर के भीतर बांध दिया ताकि बुढ़िया अपना घर न लीप सके। रविवार को गोबर न मिलने के कारण से बूढी औरत अपना घर न लीप सकीय। आँगन न लीपने के कारण उस बुढ़िया ने सूर्य भगवान् को भोग भी नहीं लगाया और उस दिन स्वयं भी भोजन नहीं किया। सूर्यास्त होने पर बूढी औरत भूखी-प्यासी सो गई। रात्रि में सूर्य भगवान् ने स्वप्न में दर्शन दिए और व्रत न करने तथा उन्हें भोग न लगाने का कारण पूछा। बूढी औरत ने बहुत ही करूण स्वर में पड़ोसन के द्वारा घर के अन्दर गाय बांधने और गोबर न मिल पाने की बात बोली।

सूर्य भगवान् ने अपनी अनन्य भक्त बूढी औरत की परेशानी के कारण जानकर उसके सब दुःख दूर करते हुए कहा, हे माता, तुम प्रत्येक रविवार को मेरी पूजा और व्रत करती हो। मैं तुमसे अति प्रसन्न हूँ और तुम्हें ऐसी गाय प्रदान करता हूँ जो तुम्हारे घर-आँगन को धन-धान्य से भर देगी। तुम्हारी सभी मनोकामनाएं पूरी होगी। स्वप्न में उस बुढ़िया को ऐसा वरदान देकर सूर्य भगवान् अंतर्ध्यान हो गए। प्रातः काल सूर्योदय से पूर्व उस बुढ़िया की आँख खुली तो वह अपने घर के आँगन में एक सुन्दर गाय और बछड़े को देखकर हैरान हो गई।

गाय को आँगन में बाँधकर उसने जल्दी से उसे चारा लाकर खिलाया। पड़ोसन ने उस बूढी औरत के आँगन में इतनी सुन्दर गाय को बंधा देखा तो वह उससे और अधिक जलने लगी। तभी गाय ने सोने का गोबर किया। गोबर को देखते ही पड़ोसन की आँख फटी की फटी रह गई। पड़ोसन ने उस बूढी औरत को वहाँ आस-पास न पाकर तुरन्त उस गोबर को उठा कर अपने घर ले गई तथा अपनी गोबर को वहाँ रख आई। सोने की गोबर से पड़ोसन कुछ ही दिनों में धनवान हो गई। गाय प्रति दिन सूर्योदय से पूर्व सोने का गोबर करती और बूढी औरत के उठने से पहले ही पड़ोसन उस गोबर को उठाकर ले जाती। बहुत दिनों तक बूढी औरत को सोने के गोबर के बारे में पता नहीं चला। बूढी औरत पहले की तरह हर रविवार को भगवान् सूर्यदेव का व्रत करती रही और कथा सुनती रही।

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