Sapda Ka Dora Vrat Katha / सांपदा का डोरा व्रत कथा

Sapda Ka Dora Vrat Katha Aur Puja Vidhi
सांपदा का डोरा व्रत कथा और पूजा विधि


Sapda Ka Dora Vrat Katha Aur Puja Vidhi, सांपदा का डोरा व्रत कथा और पूजा विधि :- साँपदा का डोरा होली के दूसरे दिन अर्थात् चैत्र कृष्ण पक्ष प्रतिपदा के दिन लिया जाता है तथा वैशाख कृष्ण पक्ष के किसी शुभ मुहूर्त में खोला जाता है।

सांपदा पूजन विधि :-

कच्चे सूत का सोलह तार का डोरा जो जलती होली को दिखाकर रख लेते हैं उसमें सोलह गाँठ लगा देनी चाहिए। फिर उसे हल्दी में रँग देना चाहिए। एक पट्टे पर जल भरा लोटा रखकर उस पर रोली से सतिया बनावें। तत्पश्चात् चावल ( अक्षत ) चढ़ाना चाहिए। फिर सोलह दाने जौ लेकर साँपदा माता की कहानी सुननी चाहिए।

कथा सुनने के बाद उस डोरे को गले में पहन लेना चाहिए। वैशाख के महीने में डोरा खोलकर साँपदा माता का व्रत तथा कहानी सुननी चाहिए। डोरा लेने के दिन जो दाने हाथ में लेकर कहानी सुनी थी उन दानों तथा डोरों को हाथ में लेकर सूर्य भगवान् का अर्घ्य देना चाहिए

सांपदा का उजमन :-

यदि किसी के लड़का हुआ हो या लड़के का विवाह हुआ हो तो साँपदा माता का उजमन करें। 16 जगह 4-4 पूड़ियाँ, सीरा तथा साड़ी आदि रखें। उनपर हाथ फेर कर सासु जी के पाँव लगकर दे देवें। 16 ब्राह्मणियों को भोजन करावें।

सांपदा व्रत कथा :-

एक नल राजा था। उसके दमयंती नामक रानी थी। नल के राज्य में अनेकों गाँव और शहर लगे हुए थे। एक दिन एक बुढ़िया राजा के महल के नीचे साँपदा माता का डोरा बाँट रही थी जिसे लेने के लिए बहुत भीड़ लगी हुई थी।

रानी ने भीड़ देखकर दासी से कहा कि यह किस बात की इतनी भीड़ हो रही है ? दासी ने पता लगा कर रानी को बताया कि एक बुढ़िया कच्चे सोलह सूत का, सोलह गाँठ का, हल्दी से रँगा हुआ साँपदा माता का डोरा बाँट रही है। इसकी जो पूजा करके 16 जौ के दाने हाथ में लेकर तथा साँपदा माता की कहानी सुनकर अपने गले में पहिनती है उसकी धन-दौलत खूब बढ़ती है।

यह सुनकर रानी भी उस बुढ़िया से साँपदा माता का डोरा माँग ली और पूजा करके तथा कहानी सुनकर अपने गले में पहिन ली।

एक दिन राजा ने जब रानी के गले में हीरे-जवाहरात के हार के साथ उस डोरे को बँधा हुआ देखा तो उसने रानी से पूछा कि यह किस बात का डोरा तुमने पहिना है ?

रानी ने कहा — यह साँपदा माता का डोरा है। इससे धन-लक्ष्मी बढ़ती है। यह सुनकर राजा ने कहा — हमारे यहाँ किस बात की कमी है, खजाने में हीरे-मोती से भरे पड़े हैं।

यह कहकर राजा ने रानी के गले से उस डोर को उतार कर फेंक दिया।

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