Shattila Ekadashi Vrat Katha / षटतिला एकादशी व्रत कथा

Shattila Ekadashi Vrat Katha Aur Puja Vidhi
षटतिला एकादशी व्रत कथा और पूजा विधि


Shattila Ekadashi Vrat Katha Aur Puja Vidhi, षटतिला एकादशी व्रत कथा और पूजा विधि :- यह व्रत माघ कृष्ण पक्ष ‘ एकादशी ‘ को किया जाता है। इसके अधिष्ठाता देव भगवान विष्णु हैं।

षटतिला एकादशी पूजा विधि :-

षट्तिला एकादशी के दिन प्रातः काल स्नान आदि करने के उपरान्त भगवान् विष्णु की पूजा कर व्रत का संकल्प लें। पंचामृत में तिल मिलाकर भगवान् को स्नान करायें। तिल मिश्रित पदार्थ को स्वयं खायें तथा ब्राह्मणों को खिलायें। दिन में हरि कीर्तन कर रात्रि में भगवान् की मूर्ति के सामने सोना चाहिए।

छह प्रकार के तिल प्रयोग होने के कारण से ‘ षट्तिला एकादशी ‘ के नाम से पुकारते हैं। इस प्रकार नियमपूर्वक विष्णु की पूजा करने पर बैकुण्ठ लोक की प्राप्ति होती हैं।

षटतिला एकादशी व्रत कथा :-

कथा ऐसी प्रसिद्ध है कि प्राचीन काल में वाराणसी में एक गरीब अहीर रहता था। दीनता से काहिल वह बेचारा कभी-कभी भूखा ही बच्चों सहित आकाश के तारे गिनता रहता। उसकी जिन्दगी बसर करने का सहारा केवल जंगल की लकड़ी थी, वह भी जब न बिकती तो फाँके फाँक कर रह जाता। एक दिन वह अहीर किसी साहूकार के घर लकड़ी पहुँचाने गया। वहाँ जाकर देखता है कि किसी उत्सव की तैयारी की जा रही हैं। जानने की उत्कट इच्छा वाला वह, साहूकार जी से पूछ बैठा — बाबू जी ! यह किस चीज की तैयारी हो रही है ?

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