Ganapati Stotra / श्री गणपति स्तोत्र

Shri Ganapati Stotra
श्री गणपति स्तोत्र


ॐ नमो विघ्नराजाय सर्वसौख्यप्रदायिने ।

दुष्टारिष्टविनाशाय पराय परमात्मने ।। 1 ।।

अर्थात् :- सम्पूर्ण सौख्य प्रदान करने वाले सच्चिदानन्द स्वरुप विघ्नराज गणेश को नमस्कार है। जो दुष्ट अरिष्ट ग्रहों का नाश करने वाले परात्पर परमात्मा हैं, उन गणपति को नमस्कार है।

लम्बोदरं महावीर्यं नागयज्ञोपशोभितम् ।
अर्धचन्द्रधरं देवं विघ्नव्यूहविनाशनम् ।। 2 ।।

अर्थात् :- जो महापराक्रमी, लम्बोदर, सर्पमय यज्ञोपवीत से सुशोभित, अर्धचन्द्र धारी और विघ्न-समूह का विनाश करने वाले हैं, उन गणपतिदेव की मैं वन्दना करता हूँ।

ॐ ह्राँ ह्रीं ह्रूँ ह्रैं ह्रौं हः हेरम्बाय नमो नमः ।
सर्वसिद्धिप्रदोऽसि त्वं सिद्धिबुद्धिप्रदो भव ।। 3 ।।

अर्थात् :- ॐ ह्राँ ह्रीं ह्रूँ ह्रैं ह्रौं ह्रः हेरम्ब को बार-बार नमस्कार है। [ हे भगवन् ! ] आप सब सिद्धियों के दाता हैं, आप हमारे लिये सिद्धिबुद्धि दायक हों।

चिन्तितार्थप्रदस्त्वं हि सततं मोदकप्रियः ।
सिन्दूरारुणवस्त्रैश्च पूजितो वरदायकः ।। 4 ।।

अर्थात् :- आपको सदा ही मोदक ( लड्डू ) प्रिय है। आप मन के द्वारा चिन्तित अर्थ को देने वाले हैं। सिन्दूर और लाल वस्त्र से पूजित होकर आप सदा वर प्रदान करते हैं।

इदं गणपतिस्तोत्रं यः पठेद् भक्तिमान् नरः ।
तस्य देहं च गेहं च स्वयं लक्ष्मीर्न मुञ्चति ।। 5 ।।

अर्थात् :- जो मनुष्य भक्तिभाव से युक्त हो इस गणपति स्तोत्र का पाठ करता है, स्वयं लक्ष्मी उसके देह-गेह को नहीं छोड़तीं।

।। इस प्रकार श्रीगणपतिस्तोत्र सम्पूर्ण हुआ ।।

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