Ganesh Ashta Avatar Smaran / गणेश अष्ट अवतार स्मरणम्

Shri Ganesh Ashta Avatar Smaranam
श्री गणेश अष्ट अवतार स्मरणम्


वक्रतुण्डावतारश्च देहानां ब्रह्मधारकः ।

मत्सरासुरहन्ता स सिंहवाहनगः स्मृतः ।। 1 ।।

अर्थात् :- वक्रतुण्डावतार देह-ब्रह्म को धारण करने वाला है, वह मत्सरासुर का संहारक तथा सिंहवाहन पर चलने वाला माना गया है।

एकदन्तावतारो वै देहिनां ब्रह्मधारकः ।
मदासुरस्य हन्ता स आखुवाहनगः स्मृतः ।। 2 ।।

अर्थात् :- एकदन्तावतार देह-ब्रह्म का धारक है, वह मदासुर का वध करने वाला है, उसका वाहन मूषक बताया गया है।

महोदर इति ख्यातो ज्ञानब्रह्मप्रकाशकः ।
मोहासुरस्य शत्रुर्वै आखुवाहनगः स्मृतः ।। 3 ।।

अर्थात् :- महोदर नाम से विख्यात अवतार ज्ञान-ब्रह्म का प्रकाशक है। उसे मोहासुर का विनाशक और मूषक वाहन बताया गया है।

गजाननः स विज्ञेयः सङ्खेभ्यः सिद्धिदायकः ।
लोभासुरप्रहर्ता वै आखुगश्च प्रकीर्तितः ।। 4 ।।

अर्थात् :- जो गजानन नामक अवतार है, वह सांख्य ब्रह्म-धारक है, उसको सांख्य योगियों के लिये सिद्धिदायक जानना चाहिये। उसे लोभासुर का संहारक और मूषकवाहन कहा गया है।

लम्बोदरावतारो वै क्रोधासुरनिबर्हणः ।
शक्तिब्रह्माखुगः सद् यत् तस्य धारक उच्यते ।। 5 ।।

अर्थात् :- लम्बोदर नामक अवतार क्रोधासुर का उन्मूलन करने वाला है ; वह सत्स्वरूप जो शक्ति ब्रह्म है, उसका धारक कहलाता है। वह भी मूषकवाहन ही है।

विकटो नाम विख्यातः कामासुरविदाहकः ।
मयूरवाहनश्चायं सौरब्रह्मधरः स्मृतः ।। 6 ।।

अर्थात् :- विकट नाम से प्रसिद्ध अवतार कामासुर का संहारक है, वह मयूरवाहन एवं सौरब्रह्म का धारक माना गया है।

विघ्नराजावतारश्च शेषवाहन उच्यते ।
ममतासुरहन्ता स विष्णुब्रह्मेतिवाचकः ।। 7 ।।

अर्थात् :- विघ्नराज नामक जो अवतार है, उसके वाहन शेषनाग बताये जाते हैं, वह विष्णुब्रह्म का वाचक ( धारक ) तथा ममतासुर का विनाशक है।

धूम्रवर्णावतारश्चाभिमानासुरनाशकः ।
आखुवाहन एवासौ शिवात्मा तु स उच्यते ।। 8 ।।

अर्थात् :- धूम्रवर्ण नामक अवतार अभिमानासुर का नाश करने वाला है, वह शिव ब्रह्म स्वरुप है। उसे भी मूषक वाहन ही कहा जाता है।

।। इस प्रकार श्रीमुद्गलपुराण में श्रीगणेशाष्टावतारस्मरण सम्पूर्ण हुआ ।।

 

सिन्दूरवर्णं द्विभुजं गणेशं लम्बोदरं पद्मदले निविष्टम् ।
ब्रह्मादिदेवैः परिसेव्यमानं सिद्धैर्युतं तं प्रणमामि देवम् ।।

अर्थात् :- ‘ सच्चिदानन्दमय भगवान् गणेश की अंग कान्ति सिन्दूर के समान है, उनके दो भुजाएँ हैं, वे लम्बोदर हैं और कमलदल पर विराजमान है। ब्रह्मा आदि देवता उनकी सेवा में लगे हैं तथा वे सिद्ध समुदाय से युक्त हैं, ऐसे श्रीगणपति देव को मैं प्रणाम करता हूँ। ‘

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