Ganesh Dhyanam / श्री गणेश ध्यानम्

Shri Ganesh Dhyanam
श्री गणेश ध्यानम्


श्रीराधा उवाच

खर्वं लम्बोदरं स्थूलं ज्वलन्तं ब्रह्मतेजसा ।
गजवक्त्रं वह्निवर्णमेकदन्तमनन्तकम् ।। 1 ।।

सिद्धानां योगिनामेव ज्ञानिनां च गुरोर्गुरुम् ।
ध्यातं मुनीन्द्रैर्देवेन्द्रैर्ब्रह्मेशशेषसंज्ञकैः ।। 2 ।।

सिद्धेन्द्रैर्मुनिभिः सद्भिर्भगवन्तं सनातनम् ।
ब्रह्मस्वरूपं परमं मङ्गलं मङ्गलालयम् ।। 3 ।।

सर्वविघ्नहरं शान्तं दातारं सर्वसम्पदाम् ।
भवाब्धिमायापोतेन कर्णधारं च कर्मिणाम् ।। 4 ।।

शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणम् ।
ध्यायेद् ध्यानात्मकं साध्यं भक्तेशं भक्तवत्सलम् ।। 5 ।।

अर्थात् :- श्रीराधा जी बोलीं :- जो खर्व ( छोटे कदवाले ) , लम्बोदर, स्थूलकाय, ब्रह्मतेज से उद्भासित, गजमुख, अग्नितुल्य कान्तिमान्, एकदन्त और अनन्त हैं ; जो सिद्धों, योगियों और ज्ञानियों के गुरु के भी गुरु हैं ; ब्रह्मा, शिव और शेष आदि देवेन्द्र, मुनीन्द्र, सिद्धेन्द्र, मुनि गण तथा संत लोग जिनका ध्यान करते हैं ; जो ऐश्वर्यवाली, सनातन, ब्रह्मस्वरूप, परम मंगल, मंगल के भण्डार, सम्पूर्ण विघ्नों को हरने वाले, शान्त, सम्पूर्ण सम्पत्तियों के दाता, कर्मयोगियों के लिये भवसागर में माया रुपी जहाज के कर्णधार स्वरुप, शरणागत-दीन-दुखी की रक्षा में तत्पर, ध्यानरूप, साधना करने योग्य, भक्तों के स्वामी और भक्त वत्सल हैं, उन गणेश का ध्यान करना चाहिये।

।। इस प्रकार श्रीब्रह्मवैवर्तपुराण के अन्तर्गत श्रीकृष्णजन्मखण्ड में भगवती राधाकृत श्रीगणेशध्यान सम्पूर्ण हुआ ।।

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