Ganesh Prarthana / श्री गणेश प्रार्थना

Shri Ganesh Prarthana
श्री गणेश प्रार्थना


आनन्दरूप करुणाकर विश्वबन्धो

सन्तापचन्द्र भववारिधिभद्रसेतो ।

हे विघ्नमृत्युदलनामृतसौख्यसिन्धो
श्रीमन् विनायक तवाङ्घ्रियुगं नताः स्मः ।। 1 ।।

अर्थात् :- हे आनन्दस्वरुप श्रीमन् विनायक ! आप करुणा की निधि एवं सम्पूर्ण जगत् के बन्धु ( अकारण हितैषी ) हैं, शोकसंताप का शमन करने के लिये परमाह्लादक चन्द्रमा हैं, भव-सागर से पार होने के लिये कल्याणकारी सेतु हैं तथा विघ्नरूपी मृत्यु का नाश करने के लिये अमृतमय सौख्य के सागर हैं; हम आपके युगल-चरणों में प्रणाम करते हैं।

यस्मिन्न जीवजगदादिकमोहजालं
यस्मिन्न जन्ममरणादिभयं समग्रम् ।

यस्मिन् सुखैकघनभूम्नि न दुःखमीषत्
तद् ब्रह्म मङ्गलपदं तव संश्रयामः ।। 2 ।।

अर्थात् :- जिसमें जीव-जगत् इत्यादि मोहजाल का पूर्णतः अभाव है ; जहाँ जन्म-मरण आदि का सारा भय सर्वथा है ही नहीं ; जिस अद्वितीय आनन्दघन भूमा में किंचिन्मात्र भी दुःख नहीं है, उस ब्रह्मस्वरूप आपके मंगलमय चरण की हम शरण लेते हैं।

।। इस प्रकार श्रीमत्परमहंसपरिव्राजकाचार्य श्रीश्रीधरस्वामिकृत श्रीगणेशप्रार्थना सम्पूर्ण हुई ।।

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