Vinayaka Stuti / श्री विनायक स्तुति

Shri Vinayaka Stuti
श्री विनायक स्तुति


नमो नमस्तेऽखिललोकनाथ

नमो नमस्तेऽखिललोकधामन् ।

नमो नमस्तेऽखिललोककारिन्
नमो नमस्तेऽखिललोकहारिन् ।। 1 ।।

अर्थात् :- हे सर्वलोकेश्वर ! आपको नमस्कार है। हे सर्वलोकधार ! आपको बार-बार नमस्कार है। हे निखिल सृष्टि के कर्ता एवं निखिल सृष्टि के संहारक ! आपको बार-बार नमस्कार है।

नमो नमस्ते सुरशत्रुनाश
नमो नमस्ते हृतभक्तपाश ।

नमो नमस्ते निजभक्तपोष
नमो नमस्ते लघुभक्तितोष ।। 2 ।।

अर्थात् :- हे देव-शत्रुओं के विनाशक ! आपको बार-बार नमस्कार है।  भक्तों का पाश नष्ट करने वाले हे प्रभो ! आपको बार-बार नमस्कार है। अपने भक्तों का पोषण करने वाले आपको बार-बार नमस्कार है। थोड़ी-सी भी भक्ति से सन्तुष्ट होने वाले हे प्रभो ! आपको बार-बार नमस्कार है।

निराकृते नित्यनिरस्तमाय
परात्पर ब्रह्ममयस्वरुप ।

क्षराक्षरातितगुणैर्विहीन
दीनानुकम्पिन् भगवन्नमस्ते ।। 3 ।।

अर्थात् :- आप निराकार, अन्धकार से सदा दूर रहने वाले अर्थात् प्रकाश स्वरुप, परात्पर, ब्रह्मस्वरूप, क्षर-अक्षर से अतीत, सत्त्वगुणादि से रहित एवं दीनजनों पर अनुकम्पा करने वाले हैं ; हे भगवान् ! आपको नमस्कार है।

निरामयायाखिलकामपूर
निरञ्जनायाखिलदैत्यदारिन्

नित्याय सत्याय परोपकारिन्
समाय सर्वत्र नमो नमस्ते ।। 3 ।।

अर्थात् :- आप निरामय, पूर्णकाम ( सम्पूर्ण कामनाओं से रहित ), निरंजन, सम्पूर्ण दैत्यों का दलन करने वाले, नित्य, सत्य, परोपकारी और सर्वत्र समरूप से निवास करते हैं ; आपको बार-बार नमस्कार है।

।। इस प्रकार श्रीगणेशपुराण में श्रीविनायकस्तुति सम्पूर्ण हुई ।।

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