Somvati Amavasya Vrat Katha / सोमवती अमावस्या व्रत कथा

Somvati Amavasya Vrat Katha Aur Puja Vidhi
सोमवती अमावस्या व्रत कथा और पूजा विधि


Somvati Amavasya Vrat Katha Aur Puja Vidhi, सोमवती अमावस्या व्रत कथा और पूजा विधि :- जिस अमावस्या को सोमवार हो उसी दिन इस व्रत का विधान है। यह स्नान, दान पर्वों में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।

सोमवती अमावस्या पूजा विधि :-

इस दिन प्रातः काल स्नान आदि करने के उपरान्त पूजा के समय व्रत का संकल्प लें। यह स्नान दान पर्वों में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। निर्णय-सिन्धु के व्यास-वचनानुसार इस दिन मौन रहकर स्नान-ध्यान करने से हजारों गोदान का पुण्यफल प्राप्त होता है।

इस दिन पीपल की 108 बार परिक्रमा करते हुए पीपल तथा विष्णु के पूजन का नियम है। प्रदक्षिणा के समय 108 फल अलग रखकर समापन के समय वेदपाठी ब्राह्मण को दान में देना चाहिए।

यह स्त्रियों का प्रमुख व्रत है। सोमवार चन्द्रमा का दिन है। इस दिन ( हर अमावस्या को ) सूर्य तथा चन्द्र एक सीध में स्थित रहते हैं। इसलिए यह पर्व विशेष पुण्य वाला होता है। 

सोमवती अमावस्या व्रत कथा :-

सोमवती अमावस्या को लेकर कथाएं इस प्रकार है। एक गरीब ब्राह्मण परिवार था। उनकी एक कन्या थी जो कि बहुत प्रतिभावान एवं सर्वगुण सम्पन्न थी। जब वह विवाह के योग्य हो गई तो ब्राह्मण ने उसके लिए सुयोग्य वर खोजना शुरू कर दिया। कई योग्य वर मिले परन्तु गरीबी के कारण विवाह की बात नहीं बनती। एक दिन ब्राह्मण के घर एक साधु आये। कन्या का सेवाभाव देख साधु बहुत प्रसन्न हुए और दीर्घायु होने का आशीर्वाद दिया। ब्राह्मण के पूछने पर साधु ने कन्या के हाथ में विवाह की रेखा न होने की बात कही। इसका उपाय पूछने पर साधु ने बताया कि पड़ोस के गाँव में सोना नामक धोबिन का परिवार है। कन्या यदि उसकी सेवा करके उससे उसका सुहाग माँग ले तो उसका विवाह संभव है। ब्राह्मण की पुत्री ने जैसा उस साधु ने बताया वैसा ही किया। कुछ समय के बाद उस ब्राह्मण की पुत्री का विवाह एक अच्छे परिवार में हो गया।

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